17 लाख टन यूरिया आयात करने की तैयारी में सरकार, दावा - देश में खाद का पर्याप्त भंडार मौजूद *ERTI* #99O

संक्षिप्त विवरण

उर्वरक विभाग ने स्पष्ट किया कि खरीफ सीजन के लिए देश में खाद की उपलब्धता पूरी तरह पर्याप्त है। सरकार द्वारा 17 लाख टन यूरिया आयात करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। घरेलू उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर होने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समय रहते पुख्ता इंतजाम किए जाने से देश की खाद सुरक्षा मजबूत स्थिति में है। इसके साथ ही जैविक खाद की मांग में भी पिछले वर्ष के मुकाबले भारी उछाल दर्ज किया गया है। बता दें पिछले वर्ष देशभर में खाद किल्लत हुई थी।


खरीफ सीजन के लिए खाद की मांग और वर्तमान स्टॉक की स्थिति

कृषि मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार, चालू खरीफ सीजन के लिए देश में कुल 383.9 लाख टन खाद की आवश्यकता होने की संभावना जताई गई है। इस अनुमानित मांग के मुकाबले वर्तमान में देश के पास 196.65 लाख टन खाद का स्टॉक पहले से ही मौजूद है, जिसे सामान्य स्तर से काफी बेहतर माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, किसानों ने अब तक अपनी कुल जरूरत का लगभग 37 प्रतिशत यानी 102.78 लाख टन रासायनिक खाद की खरीदारी पूरी कर ली है। अधिकारियों का दावा है कि सरकार की बेहतर योजना और समय से पहले स्टॉक जुटाने की रणनीति के कारण यह सुचारू आपूर्ति संभव हो सकी है।

17 लाख टन यूरिया आयात की प्रक्रिया अंतिम चरण में

खाद की घरेलू आपूर्ति को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) की ओर से 17 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए टेंडर आमंत्रित किया गया था। इस वैश्विक निविदा के जवाब में दुनिया भर की विभिन्न कंपनियों से 60 लाख टन से अधिक की आपूर्ति के लिए बोलियां प्राप्त हुई हैं। इन बोलियों में सबसे न्यूनतम कीमत लगभग 445 डॉलर प्रति टन दर्ज की गई है। उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव वंदना प्रेयसी ने एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में इस बात की पुष्टि की कि खरीफ सीजन के लिए खाद की उपलब्धता में कोई बड़ी चुनौती नहीं है और यूरिया आयात करने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत की गई खाद सुरक्षा

वैश्विक स्तर पर, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बावजूद भारत ने अपनी खाद सुरक्षा को पूरी तरह स्थिर बनाए रखा है। संकट के इस दौर में देश के लिए 50 लाख टन से ज्यादा यूरिया और पीएंडके (फास्फेटिक और पोटाश) खाद को सुरक्षित कर लिया गया है। भारत ने यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ओमान, मलेशिया, वियतनाम, रूस, जॉर्जिया, नाइजीरिया, मिस्र और नीदरलैंड जैसे देशों से संपर्क साधा है। वहीं, डीएपी (DAP) खाद की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रूस, मोरक्को, अमेरिका, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसे देशों से आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भारत के 16 मालवाहक जहाज मौजूद हैं, जिनमें से आठ जहाजों पर यूरिया, चार पर डीएपी, तीन पर सल्फर और एक पर अमोनिया लदा हुआ है।

घरेलू स्तर पर यूरिया का रिकॉर्ड उत्पादन और रासायनिक के मुकाबले जैविक खाद की बढ़ती मांग

भारत ने बीते वर्षों में घरेलू उत्पादन के मोर्चे पर भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आंकड़ों के अनुसार, देश में यूरिया का उत्पादन साल 2014-15 के 225 लाख टन से रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज करते हुए साल 2023-24 में 314.07 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं पीएंडके खाद का उत्पादन भी इसी अवधि में 159.54 लाख टन से बढ़कर 211.22 लाख टन हो गया है। पिछले वर्ष स्थानीय स्तर पर मांग को पूरा करने के लिए 100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात किया गया था। इस बीच, रासायनिक खाद के साथ-साथ देश में जैविक खाद के प्रति किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है। चालू सीजन में अब तक किसान 11.82 लाख टन जैविक खाद खरीद चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी समान अवधि में यह आंकड़ा महज 3.31 लाख टन था। सरकार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्थितियों पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है और विभिन्न कंपनियों के सब्सिडी बिलों का साप्ताहिक आधार पर भुगतान करने के लिए पर्याप्त बजटीय व्यवस्था उपलब्ध है।

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