संक्षिप्त समाचार
केंद्र सरकार 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4% मर्चेंट शुल्क लागू करने का नियम फिलहाल टाल सकती है। सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के दावे के अनुसार, इसे अगले साल 1 जनवरी से लागू करने पर विचार किया जा रहा है। इस संभावित फैसले से आगामी कुछ वक्त के लिए दुकानदारों को राहत मिलेगी, हालांकि खबर आते ही शेयर बाजार में फिनटेक कंपनियों के शेयर गिर गए।
फेस्टिव सीजन में दुकानदारों को राहत देने की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि सरकार UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की तारीख को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है। पहले यह नियम 15 अक्टूबर से लागू होना था, लेकिन फेस्टिव सीजन के दौरान दुकानदारों और पेमेंट कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े, इसलिए इसे 1 जनवरी तक टालने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि इस संबंध में सरकार की ओर से आधिकारिक फैसला अगले कुछ ही दिनों में सामने आ सकता है।
खबर आते ही फिनटेक कंपनियों के शेयरों में दर्ज की गई गिरावट
UPI पर मर्चेंट चार्ज टलने की खबरों का सीधा असर शेयर बाजार में लिस्टेड फिनटेक कंपनियों के शेयरों पर देखा गया:
- पेटीएम (Paytm): ट्रेडिंग के दौरान शेयर एक वक्त 10% तक टूटकर ₹1,561 के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, बाजार बंद होने तक इसमें सुधार हुआ और यह 5.42% की गिरावट के साथ ₹1,640 पर बंद हुआ।
- मोबिक्विक (MobiKwik): दिन के कारोबार में इसका शेयर 8.43% गिरकर ₹235 तक चला गया था, लेकिन मार्केट क्लोज होने पर 4.57% की टूट के साथ ₹245 पर बंद हुआ।
- पाइन लैब्स (Pine Labs): शेयर ₹169 के निचले स्तर को छूने के बाद 4.39% की गिरावट लेकर ₹170 पर बंद हुआ।
- NPST: इस कंपनी का शेयर भी 3.39% गिरकर ₹1,791.30 पर बंद हुआ।
क्या हैं UPI मर्चेंट शुल्क (MDR) के नए नियम?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत UPI लेनदेन पर मर्चेंट चार्ज से जुड़े प्रमुख नियम इस प्रकार हैं:
- बड़े व्यापारियों पर 0.4% चार्ज: महीने में ₹1 लाख से ज्यादा की कमाई करने वाले व्यापारियों को ₹2,000 से ज्यादा के हर भुगतान पर 0.4% MDR और उस पर 18% GST देना होगा।
- छोटे व्यापारियों को राहत: जिन व्यापारियों का महीने में UPI से कुल कलेक्शन ₹1 लाख तक है, उन पर ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा।
- कैटेगरी बदलने का नियम: यदि कोई छोटा दुकानदार लगातार 3 महीने तक ₹1 लाख से ज्यादा का UPI पेमेंट स्वीकार करता है, तो बैंक उसे ऑटोमेटिक 'बड़े मर्चेंट' (पर्सन-टू-मर्चेंट) की श्रेणी में शिफ्ट कर देंगे।
- ₹2,000 तक का पेमेंट फ्री: बड़े व्यापारियों को भी ₹2,000 या उससे कम के छोटे पेमेंट्स पर कोई फीस नहीं देनी होगी। यह सीमा पूरे दिन की बिक्री पर नहीं, बल्कि हर एक ट्रांजैक्शन पर लागू होगी।
- मैक्सिमम चार्ज की लिमिट: ₹75,000 या उससे बड़े ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट से अधिकतम ₹300 + GST ही चार्ज लिया जाएगा।
- खास सेक्टर्स के लिए फ्लैट फीस: पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल पेमेंट, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और एजुकेशन से जुड़े व्यापारियों को ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.40% के बजाय केवल फ्लैट ₹5 देना होगा।
क्या होता है MDR और व्यापारी क्यों कर रहे हैं इसका विरोध?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह फीस होती है जो व्यापारी या दुकानदार पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीन या पेमेंट गेटवे का उपयोग करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं। इसका इस्तेमाल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसफर नेटवर्क की लागत को पूरा करने के लिए किया जाता है। यह शुल्क व्यापारी को देना होता है, ग्राहक को नहीं। हालांकि, क्रेडिट कार्ड (1.5%-2.5%) और डेबिट कार्ड (0.90% तक) के मुकाबले UPI पर MDR काफी कम तय किया गया है।
वहीं, व्यापारी संगठनों का तर्क है कि रिटेल व्यापारी और डिस्ट्रीब्यूटर कम मार्जिन पर काम करते हैं, ऐसे में लेनदेन पर अतिरिक्त चार्ज लगाने से उनकी लागत बढ़ेगी। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने सिस्टम को पारदर्शी बनाने और कैश का चलन घटाने में सहयोग किया है, इसलिए डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के दौर में उन पर शुल्क थोपना सही नहीं है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले पर विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।