संक्षिप्त खबर
उत्तराखंड में आबकारी विभाग ने कॉलेज छात्र-छात्राओं को होम डिलीवरी से शराब पहुंचाने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। मुख्य आरोपी गर्वित उर्फ विक्रांत ने 7 अक्टूबर को सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया, जबकि साथी आदित्य कुमार 8 अक्टूबर को गिरफ्तार हुआ। गर्वित की मां भी पहले पकड़ी जा चुकी हैं।
25 वर्षीय लॉ स्टूडेंट पर पूरे गिरोह को चलाने का आरोप
आबकारी विभाग के अनुसार, हरियाणा से शराब लाकर उत्तराखंड के बड़े कॉलेजों के छात्र-छात्राओं को सप्लाई की जा रही थी। इस मामले में मुख्य आरोपी गर्वित और उसके दोस्त आदित्य कुमार को गिरफ्तार किया गया है। गर्वित की मां को भी गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि इससे पहले 25 अगस्त की रात दो अन्य तस्करों को भी पकड़ा गया था।
25 वर्षीय गर्वित उत्तरांचल यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई कर रहा है। आरोप है कि वह दिल्ली और हरियाणा से सस्ती व इंपोर्टेड शराब लाकर पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं को सप्लाई करता था। विभाग का दावा है कि वह पूरे गिरोह को संचालित कर रहा था और इसके लिए बाकायदा रेट चार्ट भी बनाया गया था।
2022 में रखी गई नेटवर्क की नींव, परिवार को भी बुलाया
मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला गर्वित उर्फ विक्रांत साल 2022 में देहरादून की उत्तरांचल यूनिवर्सिटी में लॉ (LLB) की पढ़ाई करने आया था। पढ़ाई के दौरान उसने दिल्ली और हरियाणा से सस्ती व इंपोर्टेड शराब लाकर बिधौली-प्रेमनगर के पीजी और हॉस्टलों में रह रहे छात्र-छात्राओं को सप्लाई करना शुरू किया। उसने देहरादून के अलग-अलग कॉलेजों के छात्र-छात्राओं से संपर्क भी बनाया।
इसके बाद गर्वित ने पूरे परिवार को देहरादून बुला लिया और बिधौली क्षेत्र में अपने तीन कैफे भी शुरू कर लिए।
वॉट्सऐप ग्रुप और रेट कार्ड से चलता था डिलीवरी मॉडल
बताया गया है कि गर्वित ने आसपास रहने वाले 18 से 25 साल के युवाओं को 15 हजार रुपए महीने की सैलरी पर रखा था। उन्हें टू-व्हीलर (स्कूटी) देकर शराब की होम डिलीवरी का काम सौंपा गया था।
हॉस्टलों और पीजी में शराब का "रेट कार्ड" बंटवाया जाता था। ऑर्डर लेने के लिए एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया था, जिसमें डिलीवरी बॉय को सुबह-शाम हाजिरी के तौर पर अपनी सेल्फी डालनी पड़ती थी। इसी ग्रुप में लोकेशन और पैसों के लेनदेन की जानकारी भी तय होती थी। रेट लिस्ट देहरादून के अलग-अलग इलाकों में लगाई गई थी।
25 अगस्त को पहला पर्दाफाश, मां की गिरफ्तारी
25 अगस्त की रात आबकारी निरीक्षक दिवाकर चौधरी की टीम ने बिधौली क्षेत्र से एक कार और दो स्कूटी जब्त कर दो तस्करों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में तस्करों ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी 25 वर्षीय लॉ स्टूडेंट गर्वित है।
तस्करों की निशानदेही पर आबकारी टीम ने एक घर में छापेमारी की, जहां से शराब के जखीरे के साथ गर्वित की मां को भी गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, गर्वित उस समय फरार हो गया।
अग्रिम जमानत नहीं मिली, 7 अक्टूबर को सरेंडर
आबकारी विभाग ने गर्वित पर आबकारी अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं 63/72 में मुकदमा दर्ज किया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई, लेकिन उसे राहत नहीं मिली।
चारों तरफ से शिकंजा कसने के बाद बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को गर्वित उर्फ विक्रांत ने सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उसे सीधे जेल भेज दिया।
8 अक्टूबर तड़के सहयोगी आदित्य कुमार गिरफ्तार
गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को तड़के आबकारी टीम ने गर्वित के नेटवर्क से जुड़े आदित्य कुमार के बिधौली स्थित किराए के कमरे पर छापा मारा। कमरे से करीब 10 पेटी इंपोर्टेड शराब बरामद हुई। टीम ने शराब जब्त कर आदित्य को गिरफ्तार कर लिया। बताया गया है कि इतनी शराब बरामद हुई कि गिनती और कीमत का आकलन करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों को बुलाना पड़ा।
आबकारी निरीक्षक का दावा: रातभर होती थी डिलीवरी, राजस्व को करोड़ों का नुकसान
आबकारी निरीक्षक मसूरी क्षेत्र दिवाकर चौधरी के अनुसार, गर्वित उर्फ विक्रांत 2022-23 में देहरादून के बिधौली क्षेत्र में आया और वहां कैफे शुरू करने के साथ एक कॉलेज में दाखिला लिया। आरोप है कि वह हरियाणा और चंडीगढ़ से सस्ती शराब लाकर बिधौली क्षेत्र में छात्र-छात्राओं को सप्लाई करता था। इसके लिए पैम्फलेट छपवाकर शराब की रेट लिस्ट दी जाती थी और अन्य युवाओं को डिलीवरी के लिए लगाया गया था।
चौधरी के अनुसार, कुछ शराब की बोतलों पर अधिकृत होलोग्राम भी नहीं मिले हैं। आरोप है कि आरोपी छोटे पैसों का लालच देकर युवाओं से शराब की डिलीवरी करवाता था। हॉस्टलों में पैम्फलेट बांटे जाते थे, जिनमें रेट लिस्ट होती थी। कैफे के खाने के साथ शराब की भी रातभर होम डिलीवरी की जाती थी।
विभाग के अनुसार, आरोपी रोजाना करीब 20 से 25 पेटी इंपोर्टेड शराब बेचता था। इससे उत्तराखंड सरकार को सालाना करीब 5 से 10 करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान का अनुमान है। वहीं, खबर के प्रारंभिक हिस्से में दावा किया गया है कि अब तक सरकार को 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। चौधरी ने यह भी बताया कि आरोपी के परिवार के लोग भी देहरादून में कैफे संचालित कर रहे हैं।