संक्षिप्त विवरण
नई दिल्ली में शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि एयरलाइंस के मनमाने किराए को नियंत्रित करने के नए नियम फाइनल कर लिए गए हैं, जिन्हें दो हफ्ते में जारी किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों को 16 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर पेश करने का निर्देश दिया है, जिससे देश के करोड़ों यात्रियों को महंगे टिकटों से राहत मिलने की उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और सरकार का बड़ा कदम
नई दिल्ली में एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले मनमाने किराए को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई चल रही थी। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस अपारेश सिंह की बेंच को जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने हवाई किराए को कंट्रोल करने के लिए नए नियमों को पूरी तरह फाइनल कर लिया है। सरकार इन नए नियमों को अगले दो हफ्तों के भीतर जारी करने जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को निर्देश दिया है कि इन जारी होने वाले नियमों को आगामी 16 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष पेश किया जाए। इस कदम से त्योहारी या पीक सीजन के समय विमानन कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले भारी-भरकम किराए पर लगाम लगने की पूरी उम्मीद है।
अगस्त की चेतावनी और डायनामिक प्राइसिंग का गणित
हवाई किराए के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी सख्त कदम उठा चुका है। इससे पहले अगस्त महीने में हुई सुनवाई में अदालत ने केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया था कि जो एयरलाइंस तय नियमों का पालन न करें, उन्हें ग्राउंडेड (यानी उड़ान भरने से रोक) कर दिया जाए। उस समय सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने कोर्ट को बताया था कि नियम फाइनल होने तक एयरलाइंस को 'ऑफिस मेमोरेंडम' जारी किए जा रहे हैं, लेकिन एयरलाइंस इनका पालन नहीं कर रही हैं।
एयरलाइंस अपने टिकटों के दाम तय करने के लिए डायनामिक प्राइसिंग एल्गोरिदम का इस्तेमाल करती हैं। इसके तहत जैसे-जैसे विमान की सीटें भरती हैं या किसी खास रूट पर त्योहारों व छुट्टियों की वजह से डिमांड बढ़ती है, टिकट के दाम अपने आप 3 से 5 गुना तक बढ़ जाते हैं। इसी मनमाने उछाल को कंट्रोल करने के लिए जनहित याचिका दायर की गई थी।
जेट फ्यूल की बढ़ी कीमतें और एयरलाइंस का बढ़ा किराया
हाल ही में देश की प्रमुख एयरलाइंस जैसे एअर इंडिया और इंडिगो ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी जेट फ्यूल (ATF) के महंगे होने की वजह से अपना किराया बढ़ा दिया था। एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च में जेट-फ्यूल की हिस्सेदारी 30% से 40% तक होती है। 1 अक्टूबर से घरेलू एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल की कीमत 121 रुपए से बढ़कर 137 रुपए प्रति लीटर हो गई है, यानी 1 लीटर ATF की कीमत में सीधे 16 रुपए (लगभग 13.2%) की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले तीन महीनों में जेट फ्यूल कुल 27.28 रुपए महंगा हुआ है (अगस्त में 5 रुपए, सितंबर में 6.28 रुपए और अक्टूबर में 16 रुपए प्रति लीटर)।
इसके चलते एअर इंडिया ने 9 अक्टूबर से अपनी घरेलू उड़ानों में 1200 रुपए तक और इंटरनेशनल उड़ानों में 17,800 रुपए तक का एक्स्ट्रा फ्यूल चार्ज लगाने का ऐलान किया था, जो इसकी सब्सिडियरी एयर इंडिया एक्सप्रेस पर भी लागू है। वहीं, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने भी 6 अक्टूबर 2026 से अपना किराया महंगा कर दिया था।
शेयर बाजार पर दिखा असर और निवेशकों की चिंता
सरकारी सख्ती और हवाई किरायों पर नियंत्रण की इस खबर का सीधा असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। शुक्रवार को इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में 2% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह शेयर गिरकर 4,674 रुपए के स्तर पर बंद हुआ। इंटरग्लोब एविएशन का मार्केट कैप 1.81 लाख करोड़ रुपए है। निवेशकों को इस बात की आशंका है कि यदि सरकार फिक्स्ड नियम या किराए की कोई ऊपरी सीमा (कैपिंग) लागू करती है, तो इससे एयरलाइंस के प्रॉफिट मार्जिन और प्रति यात्री होने वाली कमाई (यील्ड) पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। बहरहाल, 16 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में नियमों की समीक्षा के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।