संक्षिप्त विवरण
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा है कि बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना बेतुका है क्योंकि इंटरनेट का इस्तेमाल हर व्यक्ति और बच्चों का भी मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट (CSEAM) को हटाने के लिए केंद्र को नेशनल डेटाबेस बनाने का निर्देश दिया है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 5 साल में बच्चों की अश्लील सामग्री से जुड़े मामले 26.6 गुना बढ़े हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: इंटरनेट का इस्तेमाल हर बच्चे का मौलिक अधिकार
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना हर व्यक्ति, यहां तक कि बच्चों का भी मौलिक अधिकार है और बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना बेतुका होगा। कोर्ट ने माना कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और उनकी आजादी दोनों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। कोर्ट के अनुसार, इंटरनेट पर गलत कंटेंट होने के कारण बच्चों के लिए इस पर पूरी तरह पाबंदी लगाना सही नहीं है, क्योंकि ऐसी रोक से बच्चे कम सुरक्षित वेबसाइटों और प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं, और ऑनलाइन धमकी या शोषण का सामना करने वाले बच्चे शिकायत करने से भी डर सकते हैं। यह सुनवाई 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस बनाम एस. हरिश' मामले में याचिका पर हुई, जिसमें सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा ऐसी सामग्री की पहचान करने और भारतीय पुलिस को जानकारी देने में कथित लापरवाही का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि कंपनियां ऐसी सामग्री की जानकारी अमेरिका की संस्था को देती हैं, लेकिन भारतीय कानून के तहत पुलिस को रिपोर्ट करने की जिम्मेदारी पूरी नहीं करतीं।
5 साल में 26.6 गुना बढ़े बाल अश्लील सामग्री से जुड़े मामले
गृह मंत्रालय की ओर से 29 जुलाई 2025 को लोकसभा में पेश किए गए एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, बच्चों की अश्लील तस्वीरों और वीडियो से जुड़े मामले 2018 में 44 थे, जो 2022 में बढ़कर 1,171 हो गए, यानी इनमें 26.6 गुना की वृद्धि हुई। वहीं, बच्चों के खिलाफ दर्ज साइबर अपराध के मामले 2018 में 232 थे, जो 2022 में बढ़कर 1,823 हो गए। हालांकि, केंद्र सरकार ने 2022 के बाद का डेटा रिलीज नहीं किया है। इन बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच के माध्यम से बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट (CSEAM)—यानी बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो या अन्य डिजिटल सामग्री—को पहचानने और हटाने की व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए।
नेशनल डेटाबेस और सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कड़े निर्देश
शीर्ष अदालत ने केंद्र को नेशनल डेटाबेस बनाने का निर्देश दिया है और सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यह अनिवार्य किया है कि वे ऐसा कंटेंट हटाने के दो घंटे के भीतर पुलिस या साइबर पोर्टल को रिपोर्ट दें। डेटाबेस में सामग्री की सही जांच के लिए कई इंतजाम तय किए गए हैं:
- डिजिटल पहचान: कंटेंट का डिजिटल हैश और उस वेबसाइट का लिंक रखा जाएगा, जहां वह मौजूद है।
- विशेषज्ञों द्वारा जांच: सामग्री को डेटाबेस में जोड़ने से पहले कम से कम तीन प्रशिक्षित विशेषज्ञ स्वतंत्र रूप से जांचेंगे कि वह बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी है या नहीं (शुरुआती जांच में सॉफ्टवेयर की मदद ली जा सकती है)।
- दोबारा अपलोड होने पर पहचान: सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट का डेटाबेस से मिलान कर सकेंगी, जिससे वही सामग्री दूसरे प्लेटफॉर्म पर दोबारा अपलोड होने पर भी पहचानी जा सकेगी।
- गलत जानकारी हटाने का इंतजाम: जांच का रिकॉर्ड रखा जाएगा, डेटाबेस तक पहुंच की जानकारी दर्ज होगी, समय-समय पर स्वतंत्र ऑडिट होगा और गलत तरीके से दर्ज सामग्री को हटाने व शिकायत करने की व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके अलावा, कोर्ट ने पेड और सब्सक्रिप्शन वाली सेवाओं की सख्ती से जांच करने को कहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इनके जरिए प्रतिबंधित कंटेंट न दिखाया जाए, और केंद्र से यह विचार करने को भी कहा है कि ऐसी सामग्री से कमाई गई रकम जब्त की जा सकती है या नहीं।
स्कूली पढ़ाई में शामिल होगी ऑनलाइन सुरक्षा और शिक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी इंतजाम बच्चों को इंटरनेट पर सुरक्षित रखने के लिए काफी नहीं हैं, बल्कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों को पहचानना, अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखना और गलत व्यवहार होने पर मदद मांगना सिखाना भी जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से सहमति, स्वस्थ रिश्तों, सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श, ऑनलाइन शोषण और उसकी शिकायत करने के तरीकों के बारे में बताया जाना चाहिए। इस सिलसिले में कोर्ट ने नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) और राज्य की शैक्षिक संस्थाओं को निर्देश दिया है कि वे बाल मनोवैज्ञानिकों, शिक्षकों और अभिभावक विशेषज्ञों की मदद से पढ़ाई की सामग्री तैयार करें।