संक्षेप
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बुधवार को सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए 10 सूत्रीय नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें चैनलों को राष्ट्र-विरोधी सामग्री दिखाने, भड़काऊ डिबेट करने और अपराध की सनसनीखेज रिपोर्टिंग से बचने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही एआई तकनीक के सही इस्तेमाल और प्रोग्राम कोड के सख्त पालन की बात कही गई है।
एडवाइजरी जारी करने की मुख्य वजह
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, कई निजी टीवी चैनलों द्वारा प्रोग्राम कोड के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा था। इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) की जांच में भी यह पाया गया कि कुछ चैनलों पर ऐसे कंटेंट का प्रसारण हुआ जो तय मानकों और प्रोग्राम कोड के अनुरूप नहीं थे। इसी को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय को यह नई एडवाइजरी जारी करनी पड़ी है।
आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन और संवेदनशील घटनाओं की रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध
मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, सुरक्षा बलों के आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन की लाइव कवरेज पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। ऐसे मामलों में केवल अधिकृत अधिकारी द्वारा ऑपरेशन समाप्त होने के बाद दी गई जानकारी ही प्रसारित की जा सकेगी, और जरूरत पड़ने पर टाइम-स्टैंप का उपयोग करना होगा। इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं, बड़े हादसों, हिंसा या अपराध से जुड़ी रिपोर्टिंग में अत्यधिक सावधानी बरतने, परेशान करने वाले विजुअल्स को बार-बार लूप में न चलाने, ब्लर/मास्किंग का इस्तेमाल करने और देश के आधिकारिक नक्शे (Survey of India द्वारा जारी) का ही प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
भड़काऊ डिबेट, यौन अपराध पीड़ितों की पहचान और AI के इस्तेमाल पर निर्देश
लाइव डिबेट के दौरान सांप्रदायिक या राष्ट्र-विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देने से रोकने के लिए चैनलों को पैनलिस्टों के चयन में सतर्कता बरतने को कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर म्यूट, डिस्क्लेमर या प्रसारण रोकने जैसे कदम उठाने का निर्देश है। यौन अपराध पीड़ितों की पहचान उजागर करने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जनरेटिव AI के उपयोग को लेकर कहा गया है कि इसका इस्तेमाल केवल सहायक भूमिका में हो और इससे खबर की सटीकता प्रभावित न हो।
एडिटोरियल सिस्टम को मजबूत करने की सलाह
मंत्रालय ने सभी ब्रॉडकास्टर्स को अपने रिव्यू मैकेनिज्म को मजबूत करने की सलाह दी है। न्यूज जुटाने, एडिटिंग, प्रोडक्शन और टेलीकास्ट से जुड़े सभी कर्मचारियों के लिए नियमित वर्कशॉप, ट्रेनिंग प्रोग्राम और जागरूकता सत्र आयोजित करने को कहा गया है, ताकि प्रोग्राम कोड के प्रावधानों का लगातार और सही तरीके से पालन सुनिश्चित किया जा सके।