उत्तराखंड में महसूस किए गए भूकंप के झटके
उत्तराखंड में पिछले चार दिनों के भीतर भूकंप का दूसरा बड़ा झटका महसूस किया गया है। शनिवार रात 8 बजकर 7 मिनट पर उत्तरकाशी जिले में 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसका केंद्र जमीन से 11 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। इसके अलावा शनिवार दोपहर को बागेश्वर में भी भूकंप के झटके आए, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.8 मापी गई और इसका केंद्र 5 किलोमीटर की गहराई पर था। इससे पहले 6 अक्टूबर की रात को चमोली में 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके झटके प्रदेश के सभी 13 जिलों के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कई हिस्सों में महसूस किए गए थे।
आपदा प्रबंधन के लिए राज्यभर में मॉक ड्रिल और सायरन परीक्षण
भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और पूर्व चेतावनी प्रणाली की कार्यक्षमता की जांच के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार के निर्देशानुसार अब हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे भूकंप का सायरन बजाया जाएगा। इसी कड़ी में 9 अक्टूबर को प्रदेशभर में इस चेतावनी सिस्टम की मॉक ड्रिल की गई थी। वर्तमान में राज्य में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत कुल 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। 9 अक्टूबर को हुए परीक्षण के दौरान 112 सायरनों में से कई जगह अलर्ट सफलतापूर्वक पहुंचा, हालांकि कुछ स्थानों पर सामने आई तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं।
नया सिस्मिक मैप: पूरे उत्तराखंड को मिला सबसे ज्यादा जोखिम वाला जोन
गौरतलब है कि करीब 10 महीने पहले जारी किए गए नए सिस्मिक (भूकंपीय) मैप में उत्तराखंड के भौगोलिक जोखिम को लेकर बड़ा बदलाव किया गया था। पुराने मैप में जहां राज्य के कुछ हिस्से जोन-IV और कुछ हिस्से जोन-V में आते थे, वहीं नए मैप में पूरे उत्तराखंड को सबसे अधिक भूकंपीय जोखिम वाले जोन-VI के अंतर्गत रख दिया गया है। यह नया आकलन प्रायिक भूकंपीय जोखिम मूल्यांकन (PSHA) के आधार पर किया गया है, जिसमें सक्रिय फॉल्ट, संभावित बड़े भूकंप और जमीन की प्रतिक्रिया जैसे तमाम वैज्ञानिक कारकों का बारीकी से अध्ययन किया गया है। इस नए आकलन के बाद देश के कुल 61% हिस्से को मध्यम से उच्च भूकंपीय खतरे की श्रेणी में शामिल किया गया है।