गोमती नदी के उफान से लखनऊ के कई इलाकों में बाढ़ आ गई है। जलस्तर बढ़ने से किसानों की फसलें डूब गई हैं और स्थानीय लोग घर छोड़कर किराये के मकानों में जाने को मजबूर हैं। लखनऊ में गोमती नगर, दुबग्गा, फैजुल्लागंज, माल और इटौंजा के ग्रामीण व शहरी इलाके जलमग्न हो गए हैं।
गोमती का बढ़ता जलस्तर और बेघर होते लोग
लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे गोमती नगर, दुबग्गा, फैजुल्लागंज, माल और इटौंजा के ग्रामीण व शहरी इलाके जलमग्न हो गए हैं। रविवार को जेहटा-माल रोड पर करीब डेढ़ फीट पानी बहने लगा। प्रशासन की चेतावनी के अनुसार, अगले 24 घंटों में जलस्तर दो फीट तक और बढ़ सकता है। घरों में पानी घुसने के कारण सीमा जायसवाल, मोहम्मद शमीर और शुभम जैसे कई परिवार अपने घर छोड़कर त्रिवेणीनगर व अन्य जगहों पर 3000 से 3500 रुपये देकर किराये के कमरों में शिफ्ट होने को मजबूर हो गए हैं। प्रशासन ने 10 नावों की सुविधा शुरू की है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
पीने के पानी का संकट और जलमग्न श्मशान घाट
फैजुल्लागंज, अटल चौक, और नंदन चौराहा जैसी कॉलोनियों में बाढ़ में फंसे लोग पीने के पानी के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं, क्योंकि नलों से बदबूदार पानी आ रहा है। बाढ़ का असर अंतिम संस्कारों पर भी पड़ा है। गुलाला घाट के अंत्येष्टि स्थल में डेढ़ फीट तक नदी का पानी भर गया है, जिससे लकड़ियां भींग गई हैं और बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण विद्युत शवदाह गृह बंद पड़ा है। इसके अलावा, लोगों को गैस सिलिंडर लाने जैसी दैनिक जरूरतों के लिए भी गहरे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।
डूबती फसलें और ढहते मकान
मंझौवा गांव में बाढ़ के कारण लगभग 500 बीघा धान की पकी फसल और खीरा, लौकी जैसी सब्जियां पूरी तरह डूब गई हैं। बारिश और जलभराव के चलते जयकरन, इंद्रपाल, राजाराम, महेश और सरवन के घर गिर गए हैं। किसानों के नुकसान को देखते हुए जिलाधिकारी (डीएम) ने एक हजार से अधिक बीघा फसल के नुकसान का सर्वे कराने और सरकारी सहायता देने का निर्देश दिया है। हालांकि, जलभराव अधिक होने के कारण डीएम के काफिले को कुछ गांवों के रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा।
राहत वितरण पर बवाल, झुग्गियां ढही और राजनीतिक झड़प
जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और सपा प्रवक्ता पूजा शुक्ला ने नावों के जरिये अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर राहत सामग्री बांटी। दूसरी तरफ, दाउदनगर में बंधे के पास विस्थापितों (सकटू और अमित) द्वारा बनाई गई अस्थायी झोपड़ियों व गुमटी को नगर निगम की टीम ने कथित तौर पर ध्वस्त कर दिया, जिससे लोगों में रोष है। वहीं, इटौंजा-माल रोड पर रविवार को राहत वितरण में प्रशासन पर कथित भेदभाव का आरोप लगाते हुए बाढ़ पीड़ितों और सपा कार्यकर्ताओं ने जाम लगा दिया। इसी दौरान राशन बांटकर लौट रहे भाजपा विधायक योगेश शुक्ला का काफिला रोक लिया गया। इसके बाद भाजपा और सपा कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और गाली-गलौज हुई। अंततः पुलिस, पीएसी और एसडीएम के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद जाम खुलवाया जा सका।