संक्षेप
उत्तराखंड में मंगलवार रात 10:23 बजे चमोली में आए 4.9 तीव्रता के भूकंप के बाद राज्य सरकार ने अलर्ट सिस्टम को मजबूत करने का निर्णय लिया है। अब प्रदेशभर में हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे भूकंप सायरन बजाकर अर्ली वार्निंग सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के निर्देशानुसार यह कदम प्रणाली की जांच और जन-जागरूकता के लिए उठाया गया है।
हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे बजेगा सायरन: व्यवस्था की होगी जांच
उत्तराखंड शासन ने भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली (Earthquake Early Warning System) की कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखने और जनसामान्य को जागरूक करने के लिए नियमित मॉक टेस्टिंग का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब राज्य भर में प्रत्येक माह की 9 तारीख को सुबह 11:00 बजे सायरन बजाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह सायरन किसी वास्तविक भूकंप की चेतावनी नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए स्थापित सेंसरों और सायरन सिस्टम की तकनीकी कार्यप्रणाली की जांच की जाएगी।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने आपदा प्रबंधन विभाग को इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में उन्होंने बुधवार शाम आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
चमोली में था 4.9 तीव्रता के भूकंप का केंद्र, कई जिलों में महसूस हुए झटके
यह फैसला मंगलवार रात 10:23 बजे राज्य में आए भूकंप के बाद लिया गया है। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 4.9 मापी गई थी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के आंकड़ों के मुताबिक, इस भूकंप का मुख्य केंद्र चमोली क्षेत्र के आसपास जमीन से लगभग 13 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। झटके राज्य के कई जिलों में महसूस किए गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस भूगर्भीय हलचल के कारण अब तक राज्य में कहीं से भी किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
पिछले एक महीने में 5 बार कांपी उत्तराखंड की धरती
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले एक महीने के भीतर उत्तराखंड में कुल 5 बार भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं। इससे पहले 1 सितंबर को बागेश्वर में 2.2 तीव्रता, 8 सितंबर को चमोली में 2.9 तीव्रता, 13 सितंबर को चमोली में 2.0 तीव्रता, 26 सितंबर को बागेश्वर में 3.6 तीव्रता और 28 सितंबर को ऊधम सिंह नगर में 3.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इनमें मंगलवार रात आए भूकंप से पहले 26 सितंबर को बागेश्वर में आया 3.6 तीव्रता का झटका सबसे तेज मापा गया था।
पूरे उत्तराखंड को सबसे खतरनाक Zone-VI में किया गया है शामिल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 10 महीने पहले देश के सिस्मिक रिस्क मैप में संशोधन किया गया था। इस नए मैप के तहत पूरे उत्तराखंड राज्य को अत्यधिक भूकंपीय खतरे वाली श्रेणी Zone-VI में रखा गया है। इससे पहले राज्य का विभाजन दो अलग-अलग जोनों में था—जहां देहरादून, ऋषिकेश और कोटद्वार जैसे शहर Zone-IV के अंतर्गत आते थे, वहीं धारचूला, मुनस्यारी और उत्तरकाशी जैसे संवेदनशील क्षेत्र Zone-V में शामिल थे।
प्रायिक भूकंपीय जोखिम मूल्यांकन (PSHA) के तहत सक्रिय फॉल्ट रेखाओं, संभावित बड़े भूकंपीय झटकों और धरातलीय प्रतिक्रिया का वैज्ञानिक अध्ययन करने के बाद यह बदलाव किया गया था। इस नए आंकलन के बाद देश का कुल मध्यम से उच्च भूकंपीय खतरे वाला दायरा भी 59% से बढ़कर 61% दर्ज किया गया है।