सारांश :
उत्तराखंड में अगस्त 2026 तक हुए 1,480 सड़क हादसों में 884 लोगों की मौत और 1,626 लोगों के घायल होने पर सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी ने सख्त रुख अपनाया है। कमेटी के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने मुख्य सचिव व अधिकारियों संग बैठक कर हर जिले को 'जीरो फैटेलिटी जिला' बनाने और सरकारी दफ्तरों व शिक्षण संस्थानों में 'नो हेलमेट-नो एंट्री' व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं।
चार प्रमुख जिलों में सबसे अधिक जानलेवा हादसे, ग्रामीण इलाकों की स्थिति गंभीर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, समीक्षा बैठक में यह आंकड़ा सामने आया कि अगस्त 2026 तक प्रदेश में कुल 1,480 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 884 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और 1,626 लोग घायल हुए। आंकड़ों के मुताबिक राज्य के चार प्रमुख जिलों—देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल में हादसों का प्रभाव सबसे ज्यादा देखा गया।
इन जिलों का विवरण इस प्रकार दर्ज किया गया है:
- देहरादून: 131 मौतें और 322 लोग घायल हुए।
- ऊधमसिंह नगर: 229 मौतें और 338 लोग घायल हुए।
- हरिद्वार: 213 मौतें और 279 लोग घायल हुए।
- नैनीताल: 104 मौतें और 334 लोग घायल हुए।
समीक्षा के दौरान यह बात भी सामने आई कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में होने वाले हादसों में जनहानि का प्रमाण अधिक है। इसके मद्देनजर कमेटी ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के मानकों के अनुरूप प्रत्येक जिले को 'जीरो फैटेलिटी जिला' के रूप में विकसित करने के निर्देश जारी किए हैं।
सरकारी दफ्तरों, स्कूलों में नो हेलमेट-नो एंट्री और ड्राइविंग टेस्ट में कड़ाई
सड़क सुरक्षा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकारी कर्मचारियों और संस्थानों के कर्मियों हेतु सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत परिसरों में 'नो हेलमेट-नो एंट्री', बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और बिना वाहन बीमा के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू करने को कहा गया है। यही व्यवस्था सभी स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों में पढ़ाई करने वाले छात्रों पर भी अनिवार्य रूप से लागू की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सभी परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक स्थापित कर चालकों की कंप्यूटर आधारित परीक्षा लेना अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया है।
चारधाम मार्ग पर ANPR कैमरे, क्रैश बैरियर और 'गोल्डन ऑवर' इलाज की व्यवस्था
चारधाम यात्रा मार्गों पर वाहनों की लगातार निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों पर त्वरित कार्रवाई के लिए एएनपीआर (ANPR) कैमरे लगाने का फैसला किया गया है। साथ ही वर्तमान कैमरों में अन्य ट्रैफिक उल्लंघनों की ट्रैकिंग को जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
मार्गों पर अन्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निम्न कदम उठाने को कहा गया है:
- कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से चारधाम मार्गों पर ट्रॉमा सेंटर और चालक विश्राम गृह बनाने की संभावनाएं तलाशना।
- पर्वतीय क्षेत्रों में वाहनों को दुर्घटनाग्रस्त होकर खाई में गिरने से रोकने के लिए अवशेष मार्गों पर आईआरसी (IRC) मानकों के अनुरूप क्रैश बैरियर लगाना और इसकी समय सीमा तय करना।
- दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को 'गोल्डन ऑवर' के भीतर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु मेडिकल रिस्पांस टाइम को कम करना, जिससे अधिक से अधिक जानें बचाई जा सकें।
- प्रधानमंत्री राहत योजना का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
गड्ढों व आवारा पशुओं पर नीति और हादसों की मासिक मॉनिटरिंग
सड़कों पर बने गड्ढों (पॉट होल्स) के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए सड़क सुधार कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने को कहा गया है। इसके अलावा, आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक लगाने हेतु राज्य सरकार को एक विशिष्ट नीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
कमेटी के निर्देशों के अनुसार, अब प्रत्येक सड़क दुर्घटना का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा, जिसमें हादसे का मूल कारण, मृत्यु की वजह और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों को शामिल किया जाएगा। जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकें हर महीने अनिवार्य रूप से आयोजित होंगी और बैठकों में लिए गए निर्णयों की कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) को मोर्थ (MoRTH) पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
