सारांश :
देहरादून में उत्तराखंड सरकार ने गोपालन योजना का विस्तार करते हुए इसमें सामान्य वर्ग के पशुपालकों को भी शामिल कर लिया है। पहले यह योजना केवल अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए (90% तक, अधिकतम ₹54000) सीमित थी। नए नियमों के तहत सामान्य वर्ग को भी पशु यूनिट पर अधिकतम 45,000 रुपये तक का अनुदान मिलेगा, जिससे राज्य में डेयरी व्यवसाय को नया बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
गोपालन योजना के नियमों में बड़ा बदलाव
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से गोपालन योजना के नियमों में महत्त्वपूर्ण संशोधन किया है। अब तक यह योजना केवल अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के पशुपालकों तक ही सीमित थी। सरकार के नए निर्णय के बाद अब सामान्य वर्ग के छोटे और मध्यम पशुपालक परिवार भी योजना के अंतर्गत सब्सिडी का लाभ उठाकर नया पशुपालन व्यवसाय शुरू कर सकते हैं या अपनी मौजूदा डेयरी का विस्तार कर सकते हैं।
60 हजार रुपये की यूनिट पर श्रेणीवार सब्सिडी व्यवस्था
योजना के नए प्रावधानों के अनुसार, एक गो या भैंस यूनिट की अधिकतम सहायता राशि 60 हजार रुपये निर्धारित की गई है। इसमें सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को यूनिट लागत का 75 प्रतिशत यानी अधिकतम 45 हजार रुपये तक का सरकारी अनुदान प्राप्त होगा, जबकि शेष 15 हजार रुपये की राशि पशुपालक को खुद वहन करनी होगी। वहीं एससी और एसटी वर्ग के लाभार्थियों को 90 प्रतिशत अनुदान के तहत अधिकतम 54 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी और उन्हें केवल 6 हजार रुपये अपने पास से लगाने होंगे। अनुदान की अंतिम गणना निर्धारित नियमों और स्वीकृत यूनिट लागत के आधार पर की जाएगी।
डीबीटी के जरिए सीधे खाते में आएगी राशि
भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार अनुदान की राशि आधार-आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजेगी। योजना का लाभ लेने के इच्छुक पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशुपालन विभाग के कार्यालय से पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और शर्तों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी क्षेत्र को मिलेगी मजबूती
योजना का दायरा व्यापक होने से पशुपालकों पर शुरुआती निवेश का आर्थिक बोझ काफी कम होगा। सरकार की इस पहल से राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों की नियमित आय का जरिया मजबूत होने की संभावना है।
