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नीले ड्रम में मिले थे शव के 5 टुकड़े : सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और प्रेमी साहिल को फांसी की सजा

संक्षिप्त विवरण: 

मेरठ में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने उनकी पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। हत्या के बाद उनके शव को 5 टुकड़ों में काटकर एक नीले ड्रम में भर दिया गया था। कोर्ट ने इसे नृशंस हत्याकांड करार देते हुए दोनों पर जुर्माना भी लगाया है। सजा के ऐलान के बाद वकीलों ने कोर्ट के बाहर लड्डू बांटे।



नृशंस हत्याकांड: नीले ड्रम में मिले थे शव के 5 टुकड़े

मेरठ में हुए इस सनसनीखेज मामले में 3 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या की गई थी। हत्या के बाद उनके शव को 5 टुकड़ों में काटकर एक नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे देश की नजर अदालत के फैसले पर टिकी हुई थी। अभियोजन पक्ष के वकील विजय बहादुर और अधिवक्ता कृष्ण कुमार दुबे ने बताया कि जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने इस जघन्य अपराध को नृशंस हत्याकांड मानते हुए किसी भी तरह की माफी से इनकार कर दिया।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान रो पड़े दोषी, मुस्कान ने की बच्चों की चिंता

सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जोड़ा गया। सजा का ऐलान सुनते ही दोनों फूट-फूटकर रोने लगे और सदमे में नजर आए। जज ने जब मुस्कान से पूछा कि वह अपने पति की हत्या में दोषी है और क्या सजा चाहती है, तो उसने जवाब दिया कि उसकी बच्चियों का ख्याल रखा जाए, जिसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से पूछे जाने पर वह चुप रहा।

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और वकीलों की प्रतिक्रिया

अदालत ने मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड देने के साथ-साथ धारा 302 के तहत 50 हजार रुपए और धारा 238ए के तहत 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि किसी महिला को फांसी की सजा सुनाया जाना अपने आप में एक मिसाल है। फैसले के बाद मेरठ कोर्ट के बाहर वकीलों ने एक-दूसरे को लड्डू खिलाकर अपनी खुशी जाहिर की और इसे सही एवं ऐतिहासिक फैसला बताया।

पीड़ित परिवार को मिला न्याय, डीएनए टेस्ट से इनकार

सौरभ राजपूत के भाई बबलू ने फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें शुरू से ही न्याय की उम्मीद थी और वे चाहते थे कि दोषियों को फांसी की सजा मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनका दोषियों से कोई संपर्क नहीं है और यदि उन पर डीएनए टेस्ट कराने का दबाव डाला गया, तो उनका परिवार डीएनए टेस्ट भी नहीं करवाएगा। वहीं, सौरभ की मां ने भी न्याय मिलने पर राहत की सांस ली और रो पड़ीं।

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