संक्षिप्त विवरण
रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी वाली कंपनी जियो-बीपी ने पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 प्रति लीटर महंगा कर दिया है, जो इस साल की पहली बढ़ोतरी है और नई कीमतें रविवार से लागू हो चुकी हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, सरकारी रिफाइनरियां लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचने के कारण रोजाना लगभग ₹530 करोड़ का भारी नुकसान उठा रही हैं।
जियो-बीपी ने बढ़ाई कीमतें, राज्यों में हुए नए रेट लागू
रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित जियो-बीपी द्वारा कीमतें बढ़ाए जाने के बाद विभिन्न राज्यों में ईंधन के नए दाम सामने आए हैं। इसके बाद पंजाब में जियो-बीपी के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल करीब ₹108.54 और डीजल ₹99.19 प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं, हरियाणा में पेट्रोल की कीमत बढ़कर करीब ₹109.80 और डीजल की ₹97.75 प्रति लीटर हो गई है। पिछले 10 दिनों के भीतर जियो-बीपी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने वाली देश की दूसरी तेल कंपनी बन गई है। इससे पहले 3 अक्टूबर को रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी ने भी पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 प्रति लीटर महंगा किया था, जिससे भोपाल में पेट्रोल ₹119.54 और डीजल ₹102.64 प्रति लीटर हो गया था।
ग्लोबल मार्केट में तेजी और एक्सपोर्ट में अधिक फायदा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में भारी तेजी आने के कारण रिटेल कीमतों और बढ़ती लागत के बीच का अंतर काफी बढ़ गया है। रेटिंग एजेंसी ICRA के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक बाजार में कीमतें अधिक होने के कारण भारतीय रिफाइनरियों के लिए देश के भीतर सस्ता तेल बेचने के मुकाबले विदेश में एक्सपोर्ट करना ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है। सितंबर तक निजी कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹5 और डीजल पर ₹23 प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा था, और क्रूड ऑयल के 107 डॉलर के पार जाने से यह घाटा और अधिक बढ़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए जियो-बीपी ने सितंबर में डीजल की बिक्री 50 लीटर तक सीमित कर दी थी, जिस पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने निजी रिफाइनरियों के साथ चर्चा करने की बात कही है।
सरकारी कंपनियों पर बढ़ा दबाव और भारी नुकसान
निजी पंपों पर पाबंदी और दाम बढ़ने के बाद अब ग्राहकों की भीड़ इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी कंपनियों के पेट्रोल पंपों की तरफ रुख कर रही है, जिनकी देश के रिटेल फ्यूल मार्केट में 90% हिस्सेदारी है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, सरकारी रिफाइनरियां लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचने के कारण रोजाना लगभग ₹530 करोड़ का भारी नुकसान उठा रही हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट तनाव से घटी सप्लाई
दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध का बेहद बुरा असर पड़ा है। इस सप्लाई संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतें लगातार ऊपर बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर देश के घरेलू बाजार और तेल कंपनियों की अर्थव्यस्था पर पड़ रहा है।