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इस बार 40 फीसदी तक कम हुई सेब की पैदावार : मंडियों में आसमान छू रहे दाम, 40-60% बढ़ेंगे

संक्षेप: 

देश के शीर्ष सेब उत्पादक राज्यों जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में मौसम की मार से सेब की पैदावार में भारी गिरावट आई है। आंकड़ों के अनुसार, उत्पादन 40% से 50% तक घटने से मंडियों में आपूर्ति कम हो गई है, जिससे अच्छी गुणवत्ता वाले सेब के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार सेब के दाम प्रत्येक वर्ष के मुकाबले 40-60% बढ़ेंगे। वहीं त्योहारों में बढ़ोत्तरी आसमान छू सकती है।

पैदावार में भारी गिरावट के कारण इस बार महंगा पड़ेगा सेब

इस साल बाजारों में ग्राहकों को सेब खरीदने के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। देश में सेब उत्पादन के दो सबसे बड़े राज्यों, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में पैदावार में भारी कमी आई है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सामान्य वर्षों में जहां 20 से 22 लाख टन सेब का उत्पादन होता था, वहीं इस बार इसके केवल 14 से 15 लाख टन तक ही सिमट जाने का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर में उत्पादन में करीब 40 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई है। दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश में भी पिछले साल के 4.07 लाख टन के मुकाबले इस वर्ष अब तक सिर्फ 3.87 लाख टन सेब ही बाजार पहुंच पाया है। पिछले साल हिमाचल का कुल उत्पादन सात लाख टन रहा था, जिसके मुकाबले इस साल उपज काफी कम रहने की आशंका है।

कश्मीर से लेकर हिमाचल तक मौसम और बेमौसम बारिश की मार

उत्पादन में इस भारी किल्लत का मुख्य कारण प्रतिकूल मौसम, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश है। पर्याप्त बर्फबारी न होने से ठंड के आवश्यक घंटे कम हुए हैं। जम्मू-कश्मीर उद्यान विभाग के अनुसार, दक्षिण कश्मीर के शोपियां (हीरपोरा, केलर, जैनपोरा) और कुलगाम (डीएच पोरा, फ्रिसल) के ऊपरी इलाकों में मई-जून के दौरान हुई बेमौसम ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने फसल को 45 से 55 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा बडगाम के खानसाहिब व चरार-ए-शरीफ और पुलवामा के त्राल व राजपोरा के पारंपरिक बागानों में परागण के समय लगातार बारिश और कम धूप होने से फल तेजी से गिरे। हिमाचल में भी फलों के गिरने (ड्रॉपिंग) की समस्या अधिक रही, जिसके चलते सेब सीजन 15 दिन की देरी से शुरू हो सका।

ए-ग्रेड सेब की किल्लत और जलवायु परिवर्तन से निपटने की चुनौती

मंडियों में आपूर्ति घटने का असर साफ नजर आ रहा है। सोपोर फ्रूट मंडी के फल व्यापारी हाजी मुश्ताक अहमद के अनुसार, मंडियों में रोजाना पहुंचने वाली गाड़ियों की संख्या काफी कम हो गई है। खासकर शोपियां और कुलगाम से आने वाले 'ए' ग्रेड सेब की भारी किल्लत देखी जा रही है। उत्पादन पर मंडराते इस संकट को लेकर हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी का कहना है कि जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई डेंसिटी (उच्च घनत्व) पौधरोपण को बढ़ावा देने के साथ ही बदलते मौसम में आधुनिक तकनीक और नए रूट स्टॉक अपनाने की अनिवार्यता पर जोर दिया है।

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