उत्तराखंड में बिजली संकट से निपटने के लिए ढकरानी (देहरादून), खटीमा (ऊधमसिंह नगर), पथरी (हरिद्वार), तिलोथ (उत्तरकाशी) में चार मेगा बैटरी बैंक (BESS) बनाए जाएंगे। शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, नियामक आयोग ने 76 मेगावाट के इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। इसका जिम्मा पतंजलि रिन्यूएबल एनर्जी और आर्मी इन्फोटेक को सौंपा गया है, जिससे पीक आवर्स में बिजली की किल्लत दूर होगी।
उत्तराखंड में ऊर्जा भंडारण की बड़ी तैयारी
उत्तराखंड में बिजली की बढ़ती मांग और आपूर्ति में कमी के बीच एक बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने राज्य में 76 मेगावाट (190 मेगावाट-ऑवर) क्षमता वाले चार मेगा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट्स को सशर्त मंजूरी दे दी है। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा और सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने इसके तय टैरिफ और बिजली खरीद समझौते के मसौदे को हरी झंडी दिखा दी है।
इन 4 जगहों पर लगेंगे मेगा बैटरी बैंक
ये बैटरी प्रोजेक्ट्स राज्य के चार अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे। ढकरानी (देहरादून) में 30 मेगावाट, खटीमा (ऊधमसिंह नगर) में 15 मेगावाट और पथरी (हरिद्वार) में 16 मेगावाट के प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी पतंजलि रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई है। वहीं, तिलोथ (उत्तरकाशी) में 15 मेगावाट का प्रोजेक्ट लगाने का काम आर्मी इन्फोटेक लिमिटेड को मिला है।
टेंडर प्रक्रिया और दिल्ली-पंजाब से भी सस्ती दरें
यूजेवीएनएल (UJVNL) द्वारा आयोजित खुली ई-निविदा में पतंजलि ने चारों प्रोजेक्ट्स के लिए सबसे कम दरें पेश की थीं। हालांकि, टेंडर नियमों के अनुसार एक कंपनी को अधिकतम दो प्रोजेक्ट ही दिए जा सकते थे, जिसके चलते पतंजलि ने तिलोथ प्रोजेक्ट छोड़ दिया। इसके बाद दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली (एल-2 बिडर) कंपनी आर्मी इन्फोटेक लिमिटेड ने पतंजलि की सबसे कम दर पर ही काम करने पर सहमति जता दी।
राज्य में तय की गई बीईएसएस की दरें दिल्ली और पंजाब से भी काफी सस्ती हैं। ढकरानी में 2,69,832, पथरी में 2,79,501, खटीमा में 2,79,782 और तिलोथ में 2,80,000 रुपये प्रति मेगावाट/माह की दर तय हुई है। आयोग के अनुसार, हाल ही में दिल्ली में यह दर 2.99 लाख और पंजाब में 3.35 लाख से 3.44 लाख रुपये प्रति मेगावाट/माह मंजूर हुई है।
केंद्र सरकार से मिलेगी भारी वित्तीय सहायता
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना के तहत पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से उत्तराखंड को 500 मेगावाट-ऑवर की क्षमता आवंटित की गई थी। इसमें से 250 मेगावाट-ऑवर के प्रोजेक्ट्स का क्रियान्वयन यूजेवीएनएल के माध्यम से किया जा रहा है। इस विशेष योजना के तहत केंद्र सरकार राज्य को 18 लाख रुपये प्रति मेगावाट-ऑवर की भारी वित्तीय सहायता तीन किस्तों में प्रदान करेगी।
पीक आवर्स में कैसे काम करेगा यह विशाल बैटरी सिस्टम?
इस सिस्टम की कार्यप्रणाली बेहद प्रभावी होगी। सामान्य घंटों या दिन के समय जब ग्रिड में सस्ती सौर और जलविद्युत उपलब्ध होगी, तब यूपीसीएल (UPCL) द्वारा इन बैटरियों को मुफ्त में चार्ज किया जाएगा। इसके बाद, शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच जब प्रदेश में बिजली की मांग अपने चरम (पीक) पर होती है, तब इन बैटरियों के जरिए ग्रिड में बिजली की आपूर्ति की जाएगी। इस नई तकनीक से राज्य को पीक आवर्स में राष्ट्रीय एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदने से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी और ग्रिड ट्रिपिंग की समस्या भी खत्म हो जाएगी।
