संक्षेप:
शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 से प्राइवेट तेल कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया है। इस बढ़ोतरी के बाद भोपाल में इनका पेट्रोल सर्वाधिक 120 रुपये और लखनऊ में सबसे कम 107 रुपये प्रति लीटर हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण यह फैसला लिया गया है। स्थिति यही रहने पर अगले 14-15 दिनों में सरकारी कंपनियों के दाम भी बढ़ाए जा सकते हैं।
कच्चे तेल की तेजी का असर, नायरा ने बढ़ाए रेट
प्राइवेट तेल कंपनी नायरा एनर्जी ने शनिवार सुबह से ग्राहकों को बड़ा झटका देते हुए ईंधन की कीमतों में इजाफा किया है। कंपनी के अनुसार, पेट्रोल के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दामों में आई तेजी के बाद रिटेल कीमतों और बढ़ती लागत के बीच के अंतर को कम करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। इससे पहले भोपाल में पेट्रोल ₹119.54 और डीजल ₹102.64 दर्ज किया गया था।
1000586696.jpg के अनुसार प्रमुख शहरों में नायरा के नए रेट
नई दरों के लागू होने के बाद अलग-अलग शहरों में नायरा के पंपों पर कीमतें बढ़ गई हैं। 1000586696.jpg में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों में नायरा के पेट्रोल-डीजल की कीमतें (रुपये प्रति लीटर में) इस प्रकार हैं:
- भोपाल: पेट्रोल ₹120, डीजल ₹103
- जयपुर: पेट्रोल ₹118, डीजल ₹101
- लुधियाना: पेट्रोल ₹115, डीजल ₹98
- रायपुर: पेट्रोल ₹113, डीजल ₹104
- लखनऊ: पेट्रोल ₹107, डीजल ₹98
साल भर में कैसा रहा कीमतों का उतार-चढ़ाव
यह इस साल का पहला मौका नहीं है जब नायरा ने दाम में इतना बड़ा बदलाव किया है। इस साल की शुरुआत में, ईरान संघर्ष के कारण ग्लोबल एनर्जी सप्लाई प्रभावित होने पर 26 मार्च को भी कंपनी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा किया था। हालांकि, बाद में जब पश्चिम एशिया में तनाव कम हुआ और क्रूड के दाम घटे, तो कंपनी ने 1 जुलाई को पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर सस्ता कर दिया था।
सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना 530 करोड़ का घाटा
नायरा के विपरीत, सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—सहित जियो ने अभी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर महीने में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बावजूद भारत में रिटेल कीमतें स्थिर रहने से सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इकरा के अनुमान के मुताबिक, इन कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है, जिससे उन्हें रोजाना लगभग 530 करोड़ रुपये का घाटा सहना पड़ रहा है। देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन्हीं सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है, जिन्होंने पिछली बार मई में 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।