सारांश :
डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह के अनुसार, भारत 114 नए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस प्रोजेक्ट पर इस वित्त वर्ष के अंत तक फैसला होने की उम्मीद है। 'बाय एंड मेक' मॉडल के तहत भारत में असेंबल होने वाले इन विमानों में स्वदेशी हथियार लगाए जाएंगे। देश के पास अभी 36 ऑपरेशनल राफेल मौजूद हैं।
114 राफेल खरीद पर वित्त वर्ष के अंत तक फैसले के आसार
भारत की ओर से 114 नए राफेल लड़ाकू विमान हासिल करने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह के अनुसार, रक्षा मंत्रालय को रक्षा कंपनियों से मिले प्रस्तावों की गहन जांच की जा रही है और इस वित्त वर्ष के अंत तक इस सौदे पर कोई अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
यह पूरी खरीद प्रक्रिया ‘बाय एंड मेक’ (Buy and Make) मॉडल के आधार पर पूरी की जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में ही विमानों की असेंबली और उत्पादन से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देना है। इन लड़ाकू विमानों में अधिक से अधिक स्वदेशी तकनीक, भारत में निर्मित हथियार और आधुनिक सिस्टम एकीकृत किए जाएंगे।
बेड़े में जुड़ेंगे 62 राफेल, मरीन वेरिएंट में भी लगेंगे भारतीय हथियार
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल लड़ाकू विमान मौजूद हैं, जो पूरी तरह से ऑपरेशनल स्थिति में हैं। इसके अलावा, अप्रैल 2025 में भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-M (राफेल मरीन) विमानों का सौदा किया गया था, जिनकी डिलीवरी वर्ष 2030 तक पूरी होने का अनुमान है। इस तरह आने वाले चार वर्षों में भारतीय सेनाओं के पास कुल 62 राफेल विमान हो जाएंगे।
डिफेंस सेक्रेटरी ने जानकारी दी कि फ्रांस की निर्माता कंपनी पहले खरीदे गए राफेल मरीन विमानों में भी भारतीय हथियारों और प्रणालियों को लगाने पर सहमत हो गई है। इससे भारतीय सेना की स्वदेशी हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल करने की क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी।
2027 के मध्य में उड़ान भरेगा स्वदेशी तेजस Mk2
लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस Mk2 के विकास को लेकर डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि इसकी पहली उड़ान वर्ष 2027 के मध्य में आयोजित करने की योजना तैयार की गई है। सबसे पहले इसके प्रोटोटाइप का निर्माण किया जाएगा, जिसके बाद भारतीय वायुसेना द्वारा इसका कड़ा परीक्षण किया जाएगा।
शुरुआती चरण में भारतीय वायुसेना ने लगभग 120 तेजस Mk2 विमानों की आवश्यकता जताई है, हालांकि विमानों की अंतिम संख्या का निर्धारण प्रोटोटाइप परीक्षणों के परिणामों के आधार पर किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का मुख्य दायित्व हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पास है। इसमें निजी कंपनियों और MSME सेक्टर को भी जोड़ा गया है, जो विमान के फ्यूजलेज और बड़े सब-असेंबली हिस्सों के निर्माण के लिए अपनी प्रोडक्शन लाइन संचालित कर रही हैं।
विदेशी विकल्पों को छोड़ भारत का पूरा ध्यान AMCA प्रोजेक्ट पर
भारत ने फिलहाल किसी भी विदेशी पांचवीं पीढ़ी (5th Generation) के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में शामिल होने के बजाय अपने स्वदेशी प्रोजेक्ट पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। देश का मुख्य फोकस अब एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने पर है।
AMCA प्रोजेक्ट के विकास के लिए शॉर्टलिस्ट की गई रक्षा कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए थे। प्रोजेक्ट की तकनीकी जटिलताओं और इस क्षेत्र में पहली बार काम करने की चुनौतियों को देखते हुए कंपनियों ने अतिरिक्त समय की मांग की है, जिसे सरकार देने जा रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत का पूरा जोर स्वदेशी AMCA परियोजना को ही सफलतापूर्वक धरातल पर उतारने पर है।
