संक्षिप्त विवरण
उत्तराखंड में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए परिवहन विभाग अब सड़कों की भौगोलिक स्थिति, मोड़ और ढलान के आधार पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा तय करेगा। विभाग इसके लिए जल्द ही 1128 किलोमीटर लंबी 10 से अधिक प्रमुख सड़कों के सर्वे हेतु टेंडर प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। योजना के दायरे में चमोली, उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों से मार्ग आएंगे, अलग-अलग हिस्सों के लिए अलग-अलग अधिकतम रफ्तार निर्धारित की जाएगी।
प्रदेश में वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने की नई पहल
उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग एक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत अब पूरे राज्य में सभी सड़कों पर एक समान गति सीमा लागू नहीं होगी, बल्कि सड़क की बनावट, उसकी चौड़ाई, तीखे मोड़ और ढलान को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग हिस्सों के लिए अलग-अलग अधिकतम रफ्तार निर्धारित की जाएगी। विभाग की इस योजना के दायरे में चमोली, उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों से जुड़े 10 से अधिक प्रमुख मार्ग आएंगे, जिनकी कुल लंबाई 1128 किलोमीटर है। इस मूल्यांकन कार्य के लिए परिवहन विभाग जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर एजेंसी का चयन करेगा।
सड़कों के सुधारीकरण के साथ बढ़ी रफ्तार बनी हादसों की वजह
परिवहन विभाग के विश्लेषण के अनुसार, सड़कों के सुधारीकरण और आधुनिक वाहन तकनीक के कारण गाड़ियों की रफ्तार पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है, जो दुर्घटनाओं का एक मुख्य कारण बनकर उभरा है। उत्तराखंड के पर्वतीय और संकरे मार्गों पर तीखे मोड़ों व ऊंचाई वाले इलाकों में अनियंत्रित गति बेहद जोखिम भरी साबित होती है। वर्तमान में भारत सरकार की अधिसूचना के मुताबिक नगर सीमाओं के भीतर हल्के वाहनों के लिए 70 किमी/घंटा, भारी व मालवाहक वाहनों के लिए 60 किमी/घंटा, दोपहिया के लिए 60 किमी/घंटा और तिपहिया वाहनों के लिए 50 किमी/घंटा की सीमा तय है। हालांकि, राज्य के पहाड़ी इलाकों की वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए तकनीकी आधार पर गति सीमा के पुनर्निर्धारण की आवश्यकता महसूस की गई है।
पूर्व सर्वे के अनुभव के बाद 12 मार्गों पर अध्ययन का निर्णय
इससे पूर्व भी परिवहन विभाग द्वारा देहरादून से कर्णप्रयाग तक के लगभग 207 किलोमीटर लंबे मार्ग का सर्वे फरीदाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (IRTE) से कराया गया था। उस सर्वे के सफल अनुभव के आधार पर संयुक्त परिवहन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति ने प्रदेश के 12 अन्य सड़क मार्गों को चिह्नित कर सर्वे कराने का फैसला लिया है। संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा ने बताया कि सर्वे करने वाली एजेंसी अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपेगी। इसके बाद संबंधित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) सड़कों पर निर्धारित रफ्तार के सांकेतिक बोर्ड लगाएंगे, ताकि चालक सुरक्षित गति में वाहन चला सकें।
हादसों को रोकने के लिए 179 ब्लैक स्पॉट का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट
राज्य में सड़क हादसों को कम करने के लिए परिवहन विभाग ने 179 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं। संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा के अनुसार, यदि किसी स्थान पर पिछले तीन वर्षों में 5 बड़ी सड़क दुर्घटनाएं हुई हों या 8 से 10 लोगों की मृत्यु हुई हो, तो उस 500 मीटर के दायरे को 'ब्लैक स्पॉट' घोषित किया जाता है। इन दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में अल्पकालिक व दीर्घकालिक सुधार कार्य कराने के बाद अब उनका थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है, जिससे सड़क निर्माण या इंजीनियरिंग संबंधी कमियों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक सुधार किए जा सकें।
