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उत्तर प्रदेश के कैफे-रेस्तरां में नहीं चलेंगे हुक्का बार : मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजी जाएगी फैसले की प्रति

सारांश :

29 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश के 70 से अधिक कैफे और रेस्तरां की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि रेस्तरां और कैफे परिसर में बनाए गए निर्धारित स्मोकिंग एरिया (धूम्रपान क्षेत्र) में भी हुक्का बार का संचालन नहीं किया जा सकता। खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकायों के पास हुक्का बार के संचालन के लिए लाइसेंस जारी करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने यह फैसला मुख्य सचिव और डीजीपी को अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया है।



स्मोकिंग एरिया में भी हुक्का बार चलाने की अनुमति नहीं

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश में हुक्का बार के संचालन को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि रेस्तरां और कैफे परिसर में बनाए गए निर्धारित स्मोकिंग एरिया (धूम्रपान क्षेत्र) में भी हुक्का बार का संचालन नहीं किया जा सकता। इसी के साथ उच्च न्यायालय ने पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग करने वाली 70 से अधिक कैफे और रेस्तरां की याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में एम/एस अफटेक फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड और गोमतीनगर स्थित फैशन टीवी कैफे समेत अन्य प्रतिष्ठान शामिल थे।

कोर्ट ने खारिज किया लाइसेंस और 'सेल्फ सर्विस' का तर्क

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि उनके पास खाद्य सुरक्षा विभाग का वैध लाइसेंस उपलब्ध है और उन्होंने सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) के नियमों के तहत निर्धारित स्मोकिंग एरिया बनाया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील भी दी गई थी कि हुक्का बाहर तैयार किया जाएगा और ग्राहक उसे स्वयं स्मोकिंग एरिया में लेकर जाएगा, इसलिए इसे सेवा (सर्विस) नहीं माना जाना चाहिए।

हालांकि, अदालत ने इन सभी तर्कों को मानने से इनकार कर दिया। फैसले के अनुसार, 23 मई 2017 को COTPA के नियम 4(3) में किए गए संशोधन के बाद स्मोकिंग एरिया में किसी भी तरह की सेवा उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हुक्का पीने के लिए मानवीय सहायता आवश्यक होती है, इसलिए इसे सेवा की श्रेणी में ही रखा जाएगा। इसके अलावा, अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकायों के पास हुक्का बार के संचालन के लिए लाइसेंस जारी करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजी जाएगी फैसले की प्रति

अदालत ने इस फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को आवश्यक सूचना और अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए भेजने का आदेश दिया है। इसके साथ ही फैसले में यह भी उल्लेख किया गया है कि COTPA की संबंधित धाराओं के अंतर्गत पुलिस के पास हुक्का बार के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।

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