सारांश -
उत्तराखंड में मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए संवेदनशील इलाकों को चिह्नित कर संबंधित जिलों को समय से पहले अलर्ट भेजा जा रहा है, ताकि आपदा के बाद नहीं बल्कि उससे पहले ही राहत और बचाव की पूरी तैयारी की जा सके।
आधुनिक तकनीक और सैटेलाइट तस्वीरों से रखी जा रही पैनी नजर
उत्तराखंड में मानसून के मौसम में आपदा की आशंका वाले इलाकों पर अब आधुनिक तकनीक से लगातार निगरानी रखी जा रही है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग प्रदेश भर के संवेदनशील स्थानों की पहचान करने में जुटा हुआ है। इसके लिए सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य तकनीकी माध्यमों की मदद ली जा रही है। विशेष तौर पर भूस्खलन, सड़क धंसने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की आशंका वाले स्थानों को लेकर जिला प्रशासन को लगातार अलर्ट किया जा रहा है।
आपदा के बाद नहीं, पहले से तैयारी पर दिया जा रहा जोर
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने जानकारी देते हुए बताया कि जिन क्षेत्रों में आपदा आने की आशंका सबसे अधिक है, उनकी निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य आपदा आने के बाद कदम उठाने के बजाय पहले से ही पूरी तैयारी रखना है। इसी के तहत संबंधित जिला प्रशासन को समय रहते जरूरी जानकारी भेजी जा रही है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर राहत और बचाव टीमों को बिना देरी के तुरंत मौके पर तैनात किया जा सके।
खतरे का असर कम करने और सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश
विभाग का मानना है कि इस आधुनिक तकनीक के प्रयोग से संभावित प्राकृतिक खतरों को समय से पहले समझने और उनके प्रभाव को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी। पहले से जानकारी उपलब्ध होने से संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, साथ ही आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को भी अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा।