सारांश :
IIT बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या मामले में नया मोड़ आ गया है। CCTV में छात्र नकल करते दिखा, और आखिरी कॉल में उसने दोस्त से अपनी गलती भी मानी, वहीं किसी भी प्रकार के जातिगत भेदभाव की बात छात्र द्वारा नहीं की गई। दावा यह भी है कि छात्र निजी कारणों से तनाव में था। बिना किसी ठोस सबूत के एक छात्र की आत्महत्या को 'उत्पीड़न से दलित छात्र की आत्महत्या' का रंग देना और परिजनों को एक हथियार के रूप में प्रयोग करना चिंताजनक है। एक अवार्ड विजेता प्रोफेसर की SC/ST एक्ट में गिरफ्तारी की मांग करने जैसे कदमों से देश के विश्वविद्यालयों और उनके प्रोफेसरों में अब इसके विपरीत दलित छात्रों से असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है।
CCTV फुटेज और आखिरी कॉल ने पलटी कहानी
18 सितंबर को IIT बॉम्बे के पवई कैंपस में 22 वर्षीय बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या मामले में अब एक अलग ही तस्वीर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साहिल ने मौत से कुछ घंटे पहले अपनी एक करीबी दोस्त को फोन किया था। इस बातचीत में उसने थर्मोडायनेमिक्स का पेपर खराब होने की बात कही और स्पष्ट रूप से कहा, "मुझसे गलती हो गई।" सबसे अहम बात यह है कि इस पूरी बातचीत में उसने किसी भी जातिगत टिप्पणी या भेदभाव का कोई जिक्र नहीं किया। दावा यह भी है कि छात्र निजी कारणों से तनाव में था।
SC/ST एक्ट का कथित दुरुपयोग और राजनीतिकरण
छात्र की मौत के बाद उसके माता-पिता (रवींद्र और सोनाली वाकोडे) ने जातिसूचक गालियों और भेदभाव का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करा दिया। परिजनों का दावा था कि साहिल नकल नहीं कर सकता। मामले में राजनीतिकरण तब और बढ़ गया जब राहुल गांधी ने परिजनों से वीडियो कॉल कर मदद का भरोसा दिया। जानकारों के अनुसार, बिना किसी ठोस सबूत या गवाह के एक छात्र की आत्महत्या को 'दलित छात्र की आत्महत्या' का रंग देना और राजनीतिक पार्टियों द्वारा परिजनों को एक हथियार के रूप में प्रयोग करना चिंताजनक है। SC/ST एक्ट में एक अवार्ड विजेता प्रोफेसर की गिरफ्तारी की मांग करने जैसे कदमों से देश के विश्वविद्यालयों और उनके प्रोफेसरों में अब असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है।
एग्जाम हॉल का सच: क्राइम ब्रांच और CCTV फुटेज
जांच में सामने आए 54 सेकेंड के CCTV फुटेज ने कई दावों की हकीकत बयां कर दी है। फुटेज 18 सितंबर दोपहर 12:30 से 12:45 बजे के बीच का है। इसमें साहिल काली टी-शर्ट पहने आगे की सीट पर बैठा है और कथित तौर पर बार-बार नीचे झुककर कुछ देखते हुए मोबाइल से ChatGPT के जरिए नकल कर रहा है। हॉल में मौजूद प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ने उसे पकड़ा, उसका मोबाइल और आंसर शीट ली और उसे बाहर भेज दिया। इसके बाद साहिल लगभग 1:25 बजे अपने हॉस्टल के कमरे में गया और बाहर नहीं निकला। बाद में वह मृत पाया गया।
जांच कमेटी का गठन और परिजनों के नए आरोप
परिजनों ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला और निदेशक शिरीष केदारे की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। पिता रविंद्र वाकोडे ने सवाल उठाया कि FIR में नामजद होने के बावजूद गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। इसके अलावा, माता-पिता ने आरोप लगाया कि जब वे पवई परिसर के बाहर भूख हड़ताल करना चाहते थे, तो बुधवार तड़के उन्हें जबरन एक निजी कार से 555 किलोमीटर दूर वाशिम भेज दिया गया। दूसरी ओर, IIT बॉम्बे ने पूरे मामले की जांच के लिए IIT पालक्कड़ के चेयरमैन प्रो. रमेश वेंकटेश्वरन की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय हाईलेवल कमेटी बनाई है। छात्रों के तीन दिन के प्रदर्शन के बाद संस्थान के डायरेक्टर प्रो. शिरीष केदारे ने 18 में से 2 मांगें मान ली हैं और अन्य पर प्रक्रिया शुरू की है।