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इंडोनेशिया में पाम तेल उत्पादन घटने की चेतावनी : भारत में बढ़ सकती हैं खाद्य तेलों की कीमतें

सारांश :

इंडोनेशिया में भीषण सूखे और अल-नीनो के कारण पाम तेल उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई गई है। भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का करीब 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। ऐसे में इंडोनेशिया से निर्यात घटने पर भारतीय बाजार में पाम, सोयाबीन और सरसों तेल की कीमतें बढ़ने का दबाव बन सकता है। भारतीय मंडियों में कुछ समय के लिए सरसों और रिफाइंड तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

इंडोनेशिया में उत्पादन घटने और बी50 नीति से गहराएगा संकट

इंडोनेशियाई पाम ऑयल एसोसिएशन (गैपकी) के अनुसार, भीषण अल-नीनो और सूखे की वजह से देश के क्रूड पाम तेल (सीपीओ) उत्पादन में 50 लाख टन तक की बड़ी गिरावट आ सकती है। चेयरमैन एडी मार्टोनो के मुताबिक, देश में कुल 5.3 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के नेतृत्व में सरकार डीजल आयात घटाने के लिए पाम-आधारित बायोडीजल की ब्लेंडिंग 40 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी (बी50) करने जा रही है।

इस नई नीति के लागू होने से अकेले बायोडीजल के लिए 1.63 से 1.70 करोड़ टन पाम तेल की खपत इंडोनेशिया में घरेलू स्तर पर ही हो जाएगी। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में जाने वाले पाम तेल के निर्यात में भारी कटौती होगी और वैश्विक स्तर पर इसकी उपलब्धता तेजी से घटेगी।

भारतीय बाजार और अन्य खाद्य तेलों पर संभावित असर

भारत अपनी कुल खाद्य तेल जरूरतों का 55 से 60 फीसदी हिस्सा विदेशों से मंगाता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा (सालाना करीब 90 से 100 लाख टन) पाम तेल का होता है, जिसकी पूर्ति मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से की जाती है। पाम तेल सबसे सस्ता खाद्य तेल होने के कारण अन्य सभी तेलों के लिए प्राइस एंकर का काम करता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जब पाम तेल महंगा होता है तो बाजार की मांग तुरंत सोयाबीन, सूरजमुखी और घरेलू सरसों तेल की ओर शिफ्ट हो जाती है। नतीजतन, भारतीय मंडियों में भी सरसों और रिफाइंड तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

देश में वर्तमान स्टॉक और आयात के आंकड़े

दूसरी तरफ, सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार फिलहाल देश में खाद्य तेल की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। बाजार में करीब 14 से 15 लाख टन खाद्य तेल का स्टॉक मौजूद है, जो लगभग डेढ़ महीने की घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा, सितंबर महीने से सोयाबीन और मूंगफली की नई फसल की आवक शुरू होने की उम्मीद है, जिससे घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 से अब तक देश में करीब 120 लाख टन खाद्य तेल का आयात किया जा चुका है, जो पिछले साल की इसी अवधि के 116 लाख टन आयात के मुकाबले करीब 4 लाख टन अधिक है। भारत हर साल कुल 160 लाख टन खाद्य तेल का आयात करता है, जिसमें 80 लाख टन पाम तेल और बाकी सोयाबीन तथा सूरजमुखी तेल शामिल होता है।

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