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NCERT ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 9वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में अहम बदलाव किए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब छात्र मुगलों के साम्राज्य विस्तार के बजाय महाराणा प्रताप के दिवेर युद्ध, चोल वंश के सेंगोल, सिख गुरुओं की शहादत और रानी नायकी देवी जैसी वीरांगनाओं की ऐतिहासिक गाथाएं पढ़ेंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय शूरवीरों के संघर्ष से रूबरू कराना है।
NCERT का बड़ा कदम: सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में भारतीय वीरों को मिली प्रमुखता
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत नौवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव किए हैं। मंगलवार (29 सितंबर 2026) को सामने आई जानकारी के अनुसार, सामाजिक विज्ञान विषय, जो पहले चार खंडों में पढ़ाया जाता था, उसे अब दो पुस्तकों में समेट दिया गया है। इसकी भाग-दो पुस्तक को मुख्य रूप से 'भारतीय हीरो' पर केंद्रित किया गया है। विदेशी आक्रांताओं के महिमामंडन को कम करते हुए भारतीय इतिहास के नायकों और विद्रोह की घटनाओं को प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को यह बताना है कि भारतीयों ने गुलामी को कभी आसानी से स्वीकार नहीं किया था।
दिवेर का ऐतिहासिक युद्ध और वीरांगना रानियों का शौर्य
नई पाठ्यपुस्तक में सबसे बड़ा आकर्षण 1582 में विजयादशमी के दिन महाराणा प्रताप और मुगल शासक अकबर के बीच लड़ा गया ऐतिहासिक 'दिवेर का युद्ध' है, जिसमें मेवाड़ की सेना ने मुगलों को करारी शिकस्त दी थी। इसके अलावा, उन वीरांगनाओं की गाथाएं भी जोड़ी गई हैं, जिनके बारे में इतिहास में ज्यादा पढ़ाया नहीं गया। इनमें 1178 में कसरहदा में मुहम्मद गोरी को हराने वाली चालुक्य वंश की रानी नायकी देवी, दिल्ली सल्तनत का कड़ा विरोध करने वाली पूर्वी दक्कन के काकतीय वंश की रानी रुद्रमा देवी (1262-1289) और कर्नाटक के उल्लाल की रानी अब्बक्का (1525-1570) शामिल हैं। रानी अब्बक्का ने पुर्तगाली नौसेना को समुद्र में खदेड़कर भारी मात दी थी।
सिख गुरुओं की शहादत, जाट विद्रोह और सेंगोल का इतिहास
नए पाठ्यक्रम में 'मुश्किल दौर में आस्था' नाम के अध्याय के तहत सिख गुरुओं की हिम्मत और विरासत को विस्तार से समझाया गया है। इसमें गुरु अर्जुन देव और गुरु तेग बहादुर की शहादत के साथ-साथ खालसा पंथ की स्थापना की चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त, मुगलों के भारी टैक्स के बोझ के खिलाफ गंगा-यमुना दोआब के किसानों द्वारा किए गए 'जाट विद्रोह' को भी जगह मिली है। यह विद्रोह कथित तौर पर 1669 में गोकुल जाट और 1686 में सिंसिनी व सोगर के जमींदारों के नेतृत्व में हुआ था। वहीं, नए संसद भवन में स्थापित 'सेंगोल' का इतिहास भी पढ़ाया जाएगा, जो चोल राजवंश में सत्ता हस्तांतरण का प्रमुख प्रतीक हुआ करता था।
मुगलों के इतिहास में कटौती और आधुनिक भारत की पहल
किताब से मुगलों व अन्य विदेशी आक्रांताओं के पाठ को पूरी तरह नहीं हटाया गया है, लेकिन उनके साम्राज्य विस्तार की कहानियों की जगह अब कर व्यवस्था, बाजार प्रणाली और भूमि प्रबंधन जैसे विषयों को रखा गया है। प्राचीन इतिहास के साथ-साथ छात्रों को आधुनिक भारत की अहम पहलों की भी जानकारी दी जाएगी। सामाजिक विज्ञान की इस नई पुस्तक में नई शिक्षा नीति (एनईपी), स्टार्टअप, खेलो इंडिया नीति और वित्तीय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण समकालीन विषयों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है।