सारांश :
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने लाइफ, मोटर और बैंकाश्योरेंस में कमीशन की मौजूदा दरों को घटाकर 5 से 20 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। 25 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य छिपे हुए कमीशन और डिस्ट्रीब्यूशन लागत को कम कर ग्राहकों को आर्थिक राहत पहुंचाना और बैंकों द्वारा लोन के नाम पर की जाने वाली जबरन बिक्री (मिस-सेलिंग) को रोकना है। इससे LIC (कुछ उत्पादों में) समेत प्राइवेट कंपनियों के भी एजेंट्स की कमाई घटने वाली है।
डिस्ट्रीब्यूशन लागत घटाने के लिए इरडा की बड़ी पहल
बीमा नियामक ने पॉलिसियों के प्रीमियम में शामिल भारी-भरकम छिपे हुए कमीशन को नियंत्रित करने के उद्देश्य से नए नीतिगत बदलावों का मसौदा तैयार किया है। प्रस्ताव के अनुसार, लाइफ इंश्योरेंस के क्षेत्र में बैंकों और ब्रोकरों को मिलने वाले पहले साल के प्रीमियम कमीशन को, जो कई प्रोडक्ट्स में 40 प्रतिशत से भी अधिक था, अब घटाकर 5 से 20 प्रतिशत के दायरे में लाने की तैयारी है। इसके अलावा, डिस्ट्रीब्यूटरों को दिए जाने वाले एकमुश्त भारी शुरुआती भुगतान की जगह कमीशन की राशि को पॉलिसी की पूरी अवधि के दौरान किश्तों में फैलाने का सुझाव दिया गया है।
आंकड़ों में खुलासा: प्रीमियम से 3 गुना तेज बढ़ा डिस्ट्रीब्यूटरों का कमीशन
नियामक द्वारा जारी आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है कि डिस्ट्रीब्यूटरों को मिलने वाला मुआवजा वास्तविक कारोबार की वृद्धि दर की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों ने कमीशन मद में कुल 60,800 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसके विपरीत, इसी अवधि में कुल प्रीमियम में महज 6.73 फीसदी की ही बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। भारत वर्तमान में दुनिया का 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार है, लेकिन वैश्विक औसत की तुलना में यहां बीमा की पहुंच अभी भी बहुत कम बनी हुई है। इसी असंतुलन को समाप्त करने और बाजार में पारदर्शिता लाने के लिए ये नए दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।
मोटर इंश्योरेंस और बैंकाश्योरेंस पर पड़ेगा सीधा असर
विश्लेषकों के अनुसार, इस नए ढांचे से सबसे अधिक प्रभाव उन बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर पड़ेगा जो बैंकाश्योरेंस मॉडल के जरिए मोटा मुनाफा कमाते हैं। साथ ही डीलर-लिंक मोटर ब्रोकरों के कारोबार में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। मोटर इंश्योरेंस सेगमेंट के तहत नए वाहनों के अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पर मिलने वाले 25 से 50 प्रतिशत तक के कमीशन को पूरी तरह से समाप्त करने का प्रस्ताव है। पुराने वाहनों के रिन्यूअल पर भी बेहद सीमित कमीशन भुगतान की अनुमति होगी। दूसरी ओर, ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में बीमा की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से इन मानक दरों पर 10 से 20 फीसदी तक का अतिरिक्त इंसेंटिव देने का प्रावधान किया गया है।
ग्राहकों को मिस-सेलिंग से राहत और कम प्रीमियम की उम्मीद
प्रस्तावित नियमों के लागू होने के बाद बैंक लोन मंजूर करने के लिए ग्राहकों पर अपनी बीमा पॉलिसी खरीदने का दबाव नहीं बना सकेंगे। यदि कोई बैंक बीमा लेने पर कम ब्याज दर का ऑफर देता है, तो उसे दोनों दरों की जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी और ग्राहक को किसी भी अन्य बीमा प्रदाता से पॉलिसी चुनने का पूरा अधिकार होगा। चूंकि कमीशन सीधे तौर पर पॉलिसी प्रीमियम में शामिल होता है, इसलिए डिस्ट्रीब्यूशन लागत घटने से भविष्य में ग्राहकों को सस्ती पॉलिसियों का सीधा लाभ मिल सकता है।
