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यूपी में ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र और जमीन का बंटवारा हुआ ऑनलाइन : राजस्व परिषद ने लॉन्च किए नए डिजिटल पोर्टल

शुक्रवार को लखनऊ के आंबेडकर सभागार में राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र, सरलीकृत खतौनी और जमीन बंटवारे के लिए नए ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। अब खतौनी में क्षेत्रफल छह दशमलव तक सटीक दिखेगा। इस डिजिटल पहल से तहसील के चक्कर कम होंगे और राजस्व कार्यों में पारदर्शिता आएगी। राजस्व संहिता की धारा 116 के अंतर्गत सह-खातेदार अब जमीन के बंटवारे (विभाजन) के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से वाद दायर कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश में राजस्व सेवाओं को आम नागरिकों के लिए सुलभ, सटीक और पारदर्शी बनाने की दिशा में शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को एक बड़ा कदम उठाया गया है। लखनऊ स्थित आंबेडकर सभागार में राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल द्वारा तीन नई अहम डिजिटल सुविधाओं का शुभारंभ किया गया। इन सुविधाओं में ईडब्ल्यूएस पोर्टल, सरलीकृत खतौनी और राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत भूमि विभाजन का ऑनलाइन पोर्टल शामिल है।

ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन पोर्टल: तहसील के चक्करों से मिलेगी मुक्ति

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के नागरिकों को अब अपना प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों या तहसील के बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। नई व्यवस्था के अनुसार, नागरिक अब इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। यह आवेदन लेखपाल और तहसीलदार के स्तर पर डिजिटल माध्यम से ही भेजा जाएगा और वहीं से इसका निस्तारण भी होगा। आवेदक अपने आवेदन की वर्तमान स्थिति को डिजिटल माध्यम से ट्रैक कर सकेंगे। इससे कागजी कार्यवाही में कमी आएगी और पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही व समयबद्धता सुनिश्चित होगी।

सरलीकृत खतौनी: अब 6 दशमलव स्थानों तक दिखेगा जमीन का सटीक क्षेत्रफल

भूमि अभिलेखों को आम जनमानस के लिए अधिक स्पष्ट बनाने के उद्देश्य से सरलीकृत खतौनी की शुरुआत की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब खतौनी में जमीन का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित किया जाएगा। इससे भूमि की माप पहले से कहीं अधिक सटीक हो जाएगी। इसके अतिरिक्त, पुराने बंधक आदेशों और अभिलेखागार से जुड़े पुराने आदेशों को भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे जमीन के मालिकाना हक और पुराने रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी जुटाना आसान हो जाएगा।

धारा 116 के तहत जमीन का बंटवारा अब ऑनलाइन, मानचित्र की भी मिलेगी सुविधा

राजस्व संहिता की धारा 116 के अंतर्गत सह-खातेदार अब जमीन के बंटवारे (विभाजन) के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से वाद दायर कर सकेंगे। नोटिस और उद्घोषणा जैसी प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल रूप से संचालित व मॉनिटर की जा सकेंगी। संबंधित लेखपाल की रिपोर्ट सीधे पोर्टल पर उपलब्ध होगी। इसके अलावा, जमीन की वास्तविक स्थिति देखने के लिए पोर्टल पर मानचित्र की सुविधा भी दी गई है। दावा है कि इससे न्यायालय की प्रक्रिया और जमीनी हकीकत में बेहतर तालमेल स्थापित होगा और मामलों का निपटारा अधिक पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।

पीसीएस प्रशिक्षुओं से संवाद: रोवर तकनीक का प्रदर्शन और संवेदनशीलता पर जोर

इस अवसर पर राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि तकनीक का मुख्य उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करना नहीं है, बल्कि जनता की समस्याओं का सरल और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने युवा अधिकारियों को संवेदनशीलता, निष्पक्षता और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को आधुनिक 'रोवर तकनीक' के जरिए सटीक भूमि मापन का प्रदर्शन दिखाया गया। साथ ही, राजस्व प्रशासन में तकनीक के इस्तेमाल और क्षेत्र स्तर की व्यावहारिक चुनौतियों पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई।

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