सारांश :
नैनीताल के ज्योंलीकोट में दूषित पानी पीने से 2 मौतों और करीब 200 लोगों के बीमार होने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की पीठ ने प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से पानी उपलब्ध कराने, 20-25 स्थानों से पानी के सैंपल जांचने और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की गई है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: '21वीं सदी में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं, अहंकार छोड़ बाहर से बुलाएं डॉक्टर'
उत्तराखंड हाईकोर्ट में ज्योंलीकोट और आसपास के गांवों में फैले जल जनित संक्रमण को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि "बीमारी आपने दी है, इलाज भी आप कराएंगे।"
अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि 21वीं सदी में ऐसी स्थिति पैदा होना बिल्कुल ठीक नहीं है। अधिकारियों को अपनी पीठ थपथपाना बंद करने की हिदायत देते हुए पीठ ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं तो अधिकारी अपना अहंकार (ईगो) आड़े न आने दें और तत्काल बाहर से स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम बुलाएं। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब पेयजल आपूर्ति में सीवर का पानी मिक्स होने की जानकारी मिली थी, तो समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए।
10 से अधिक मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में पेश, अधिकारियों से पूछे तीखे सवाल
जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रवि बिष्ट ने कोर्ट के समक्ष 10 से अधिक मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत कीं। इन रिपोर्टों में दूषित पानी के सेवन के कारण मरीजों के लिवर में आई गंभीर खराबी और स्थिति के चिंताजनक होने की बात सामने आई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में वरिष्ठ प्रशासनिक व विभागीय अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। इनमें जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) रश्मि पंत, जल संस्थान के एसई विशाल कुमार, जल निगम के एसई अनीश कुमार और चीफ इंजीनियर आलोक शामिल थे। खंडपीठ ने उपस्थित अधिकारियों से पानी की गुणवत्ता और आपूर्ति को लेकर कई कड़े सवाल पूछे।
प्रभावित गांवों में टैंकरों से पानी और जांच के लिए निर्देश, ₹4 लाख जारी
हाईकोर्ट ने प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध और स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी को टैंकरों के माध्यम से पानी भिजवाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, संक्रमण के वास्तविक स्रोत और पानी की गुणवत्ता का सटीक पता लगाने के लिए 20 से 25 अलग-अलग स्थानों से सैंपल लेकर उनकी गहन जांच कराने के आदेश दिए गए हैं।
अदालत को सूचित किया गया कि जिलाधिकारी द्वारा मरीजों की निजी लैब में जांच कराने के लिए ₹4 लाख की राशि जारी कर दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर इस वित्तीय राशि को और बढ़ाया जाए। इसके अलावा, कोर्ट ने कुमाऊं क्षेत्र में प्रस्तावित टेस्टिंग लैब के निर्माण पर संबंधित सचिव को तुरंत फैसला लेने के निर्देश दिए। नैनीताल शहर में भी पेयजल की गुणवत्ता और सीवर लीकेज की जांच कराने के आदेश दिए गए हैं।
15 हजार आबादी पर मंडराया संकट, पेयजल स्रोत में सीवेज मिलने से हुई मौते
ज्योंलीकोट और आसपास के पांच गांवों में जल संस्थान की लापरवाही के कारण पेयजलापूर्ति में सीवेज का पानी मिल गया। विभागीय जांच में पेयजल स्रोत में दूषित सीवेज मिलने की पुष्टि हुई है। इस दूषित पानी का सेवन करने से करीब 15,000 से अधिक आबादी प्रभावित हुई।
अब तक दूषित पानी के कारण 2 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोगों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पांच गांवों के करीब 200 लोग पीलिया, तेज बुखार और उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों की चपेट में हैं। जल संस्थान और जल निगम को सख्त हिदायत दी गई है कि वे सीवर और पेयजल लाइनों के आपस में मिलने की स्थिति की तुरंत जांच कर सुधार सुनिश्चित करें। मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।