सारांश :
इलाहाबाद हाई कोर्ट परिसर में 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगमन प्रस्तावित है। इसे लेकर अधिवक्ताओं में मेडिकल कैशलेस कार्ड, मुफ्त मासिक किराया और फर्नीचर फंड जैसी घोषणाओं की उम्मीद जागी है। चैंबर्स आवंटन संघर्ष समिति के अध्यक्ष आरपी तिवारी के आवास पर हुई बैठक में विभिन्न मांगों और समस्याओं पर चर्चा की गई। वहीं, सूत्रों के अनुसार योगी सरकार चुनिंदा मीडियाकर्मियों एवं अधिवक्ताओं को कैशलैस इलाज के दायरे में लाने का विचार कर रही है।
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर अधिवक्ताओं में बढ़ीं बड़ी उम्मीदें
प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाई कोर्ट परिसर में 14 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगमन प्रस्तावित है, जिसको लेकर वकीलों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव अखिलेश शर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री से सभी अधिवक्ताओं को सकारात्मक घोषणाओं की उम्मीद है। चैंबर्स आवंटन संघर्ष समिति को आशा है कि मुख्यमंत्री अधिवक्ताओं के लिए मेडिकल कैशलेस कार्ड, चैंबर्स के मासिक किराये को पूरी तरह निश्शुल्क करने और फर्नीचर की व्यवस्था के लिए आवश्यक धनराशि जारी करने का ऐलान कर सकते हैं।
चैंबर निर्माण, उद्घाटन और आवंटन विवाद की पृष्ठभूमि
प्रदेश सरकार द्वारा मल्टी लेवल चैंबर्स बिल्डिंग के निर्माण के लिए लगभग 700 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की गई थी। इसके तहत कुल 2400 चैंबर्स बनाए गए हैं, जिनमें करीब 13 हजार अधिवक्ताओं के बैठने का इंतजाम किया गया है। इस भव्य इमारत का उद्घाटन 31 मई 2025 को संपन्न हो चुका था, लेकिन इसके आवंटन को लेकर प्रक्रिया अटक गई। इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से जारी 'चैंबर्स अलाटमेंट नियमावली 2026' के तहत 1500 रुपये मासिक किराया और 75 हजार से ढाई लाख रुपये तक की धरोहर राशि तय की गई, जिसका अधिवक्ताओं द्वारा विरोध किया जा रहा है और वे निश्शुल्क चैंबर आवंटन की मांग कर रहे हैं।
60 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन और मुख्य न्यायमूर्ति का आश्वासन
मासिक किराये और सिक्योरिटी डिपॉजिट के विरोध में 4 जुलाई को 60 सदस्यीय 'चैंबर अलॉटमेंट संघर्ष समिति' का गठन किया गया, जिसमें राजेश खरे को संयोजक बनाया गया। समिति के प्रतिनिधियों ने 6 जुलाई को मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और चैंबर आवंटन कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी सहित अन्य सदस्यों से वार्ता की। इस दौरान समिति ने आवंटन सूची में गैर-प्रैक्टिस करने वाले और मृत अधिवक्ताओं के नाम शामिल होने पर आपत्ति दर्ज कराई। साथ ही नियमावली से 'टेनेंट' व 'को-टेनेंट' शब्द हटाने, किराया समाप्त करने और धरोहर राशि कम करने का आग्रह किया। वार्ता के दौरान मुख्य न्यायमूर्ति ने आश्वस्त किया था कि यदि प्रदेश सरकार की तरफ से धनराशि उपलब्ध कराई जाती है, तो किसी भी अधिवक्ता से मेंटेनेंस चार्ज नहीं लिया जाएगा।
कालिंदीपुरम में पदाधिकारियों की बैठक और रणनीति पर चर्चा
रविवार को कालिंदीपुरम स्थित चैंबर्स आवंटन संघर्ष समिति के अध्यक्ष आरपी तिवारी के आवास पर पदाधिकारियों की एक अहम बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता आरपी तिवारी ने की तथा संचालन महासचिव जगदीश सिंह बुंदेला द्वारा किया गया। संयोजक राजेश खरे ने बताया कि मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर अधिवक्ताओं के बीच काफी चर्चाएं हैं। इस बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता, सरिता सिंह, चंद्रकांत द्विवेदी, संतोष पांडे, सुशील कुमार यादव, राजीव द्विवेदी, रतन शंकर दीक्षित, प्रभु नारायण तिवारी, अशोक गुप्ता, सुनील सहगल, अभिषेक निगम, बृजेश श्रीवास्तव, देश दीपक श्रीवास्तव, बीना देवी और दुर्गा कुमारी समेत कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।