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उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए गंगोत्री से केदारनाथ के बीच एक नया सड़क कॉरिडोर प्रस्तावित किया गया है। उत्तरकाशी के भटवाड़ी से रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण तक 94.50 किमी की सड़क बनने से दूरी करीब 150 किमी कम होगी। इससे श्रद्धालुओं का 10-12 घंटे का सफर घटकर मात्र 5-6 घंटे रह जाएगा। फिलहाल यह परियोजना प्रस्ताव और तकनीकी सर्वे के शुरुआती दौर में है।
150 किमी तक घटेगी दूरी और 6 घंटे बचेगा समय
गंगोत्री से केदारनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी योजना पर काम कर रही है। जारी प्रस्ताव के अनुसार, करीब 100 साल पुराने ऐतिहासिक पैदल ट्रैक को अब आधुनिक मोटर रोड में बदलने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में दोनों धामों के बीच का मार्ग लगभग 350 किलोमीटर लंबा है। इस नए कॉरिडोर के बनने से दूरी में लगभग 150 किलोमीटर की कमी आने का अनुमान लगाया गया है, जिससे श्रद्धालुओं का 10 से 12 घंटे का लंबा सफर घटकर करीब 5 से 6 घंटे में पूरा हो सकेगा।
भटवाड़ी से त्रियुगीनारायण तक फैलेगा नया रोड नेटवर्क
प्रस्तावित योजना के मुताबिक, यह सड़क उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी से शुरू होकर बेलक, बूढ़ाकेदार और पंवालीकांठा से गुजरते हुए रुद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण तक पहुंचेगी। कुल 94.50 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित सड़क को आगे चलकर गौरीकुंड से जोड़ने की योजना है। इस नए रूट के तैयार होने से गंगोत्री और केदारनाथ के बीच एक सीधा और वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो जाएगा।
सर्वे के बाद तय होगी सुरंगों, पुलों और जमीन की जरूरत
लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख अभियंता राजेश शर्मा के अनुसार, विस्तृत सर्वे पूरा होने के बाद ही सड़क की वास्तविक लंबाई और अंतिम अलाइनमेंट तय हो सकेगा। इस सर्वे के जरिए ही भूमि की आवश्यकता, संभावित अधिग्रहण और सड़क निर्माण के लिए आवश्यक सुरंगों व पुलों का खाका तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, पहाड़ी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, ढलान, भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों और पर्यावरणीय पहलुओं का भी गहराई से आकलन किया जाएगा।
केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद शुरू होगा निर्माण कार्य
फिलहाल यह परियोजना प्रस्ताव और तकनीकी सर्वे के शुरुआती दौर में है। सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण की वित्तीय और तकनीकी योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। लोक निर्माण विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार से सभी आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त होने के बाद ही निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य ध्येय सदियों पुराने पारंपरिक पैदल मार्ग को आधुनिक और सुरक्षित सड़क मार्ग में बदलना है।