मुख्य बिंदु
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 9 सितंबर को कच्चे तेल की कीमत 2.25% की बढ़ोतरी के साथ 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। अमेरिका और ईरान के बीच भड़के नए सैन्य तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जलमार्ग के बाधित होने से कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति पर संकट मंडराने लगा है। यदि तेल के दामों में तेजी का यह रुख बना रहा, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दामों में फिर एक बार बढ़ोतरी हो सकती है। पिछले 6 हफ्तों में यह पहला मौका है जब कच्चा तेल इस आंकड़े पर पहुंचा है।
6 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंचे कच्चे तेल के दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दामों में आए ताजा उछाल के बाद कच्चा तेल एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। इससे पहले क्रूड ऑयल की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई थी। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 6 हफ्तों में यह पहला मौका है जब कच्चा तेल इस आंकड़े पर पहुंचा है; इससे पूर्व 24 जुलाई को दाम 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंचे थे। अगर बीते एक महीने के रुझान को देखें तो 10 अगस्त को ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल पर था, यानी केवल एक माह के भीतर कच्चे तेल की कीमतों में 22% की भारी तेजी दर्ज की जा चुकी है।
अमेरिकी कार्रवाई: ईरान के 5 तेल टैंकर किए गए तबाह
तेल बाजार में अचानक आए इस उबाल की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी नई सैन्य झड़पें हैं। यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा मंगलवार देर रात जारी बयान के अनुसार, अमेरिकी सेना ने कार्रवाई करते हुए ईरान के 5 तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया है। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि उसने यह कदम ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमले के जवाब में उठाया है।
'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' बाधित होने से गहराया वैश्विक आपूर्ति संकट
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सबसे बड़ा कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का बंद होना माना जा रहा है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह लगभग 167 किलोमीटर लंबा समुद्री मार्ग वर्तमान में जारी जंग के कारण सुरक्षित नहीं रह गया है, जिसके चलते तेल टैंकरों का आवागमन ठप पड़ा है। ज्ञात हो कि दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है और सऊदी अरब, इराक, कुवैत सहित ईरान स्वयं अपने निर्यात के लिए इस पर निर्भर हैं। भारत भी अपनी जरूरतों का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से आयात करता है।
आम जनता पर महंगाई की मार का मंडराता खतरा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के महंगे होने से भारत में ईंधन की दरें बढ़ने का जोखिम उत्पन्न हो गया है। इससे पहले सरकारी तेल कंपनियों—आईओसीएल (IOC), बीपीसीएल (BPCL) और एचपीसीएल (HPCL)—ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की ऊंची कीमतों का हवाला देते हुए मई के महीने में किस्तों में पेट्रोल और डीजल के दामों में कुल ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की वृद्धि की थी। उल्लेखनीय है कि देश के 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन्हीं तीनों सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है। ऐसे में यदि वैश्विक बाजार में क्रूड लगातार तेज बना रहता है, तो आम उपभोक्ताओं पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के जरिए फिर से आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।