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उत्तराखंड पहुंचा पहला सफेद बाघ 'तेजस' : ग्वालियर से 556 KM का सड़क सफर कर देहरादून जू में दी दस्तक

उत्तराखंड के देहरादून जू में सोमवार, 28 सितंबर 2026 को पहली बार सफेद बाघ 'तेजस' (3 माह) पहुंचा। टाइगर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत उसे ग्वालियर से 556 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग से लाया गया, जिसके बदले देहरादून का बाघ 'भोला' ग्वालियर भेजा गया। पर्यटकों को तेजस के दीदार के लिए अभी करीब एक महीने का इंतजार करना होगा। पूरी तरह से सहज होने के बाद ही उसे आम जनता के लिए बाड़े में लाया जाएगा।



उत्तराखंड में पहली बार सफेद बाघ की एंट्री

उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार किसी सफेद बाघ ने कदम रखा है। सोमवार, 28 सितंबर 2026 को करीब 3 महीने की उम्र वाले सफेद बाघ 'तेजस' को ग्वालियर जूलॉजिकल पार्क से देहरादून जू लाया गया। सफेद शरीर, नीली आंखें और काली धारियों वाला यह बाघ अब स्थानीय लोगों और पर्यटकों के आकर्षण का नया केंद्र बनेगा। तेजस को बाई रोड 556 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करके एक रेस्क्यू वाहन के जरिए देहरादून लाया गया है।

13 घंटे का सफर, नहीं किया गया ट्रैंक्विलाइज

देहरादून जू की रेंजर अधिकारी एवं इंचार्ज दीक्षा भट्ट के अनुसार, ग्वालियर से देहरादून तक के इस सफर में लगभग 12 से 13 घंटे का समय लगा। इस दौरान रेस्क्यू टीम में करीब 13 लोग मौजूद थे। स्वास्थ्य कारणों से बाघ को एक रात के इस पूरे सफर में खाना नहीं दिया गया, ताकि उसे रास्ते में कोई परेशानी न हो। खास बात यह रही कि इतनी लंबी यात्रा के बावजूद इस युवा बाघ को ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) करने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

एक्सचेंज प्रोग्राम: 'भोला' के बदले आया 'तेजस'

यह अदला-बदली देहरादून और ग्वालियर जूलॉजिकल पार्क के बीच हुए टाइगर एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत की गई है। इस प्रक्रिया को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की मंजूरी के बाद पूरा किया गया है। समझौते के तहत देहरादून जू से नर बाघ 'भोला' को ग्वालियर भेजा गया है और उसकी जगह ग्वालियर से 'तेजस' को यहां लाया गया है। इस कदम से देहरादून जू में वन्यजीवों की आनुवंशिक विविधता में भी इजाफा होगा।

पर्यटकों को दीदार के लिए करना होगा इंतजार

सफेद बाघ के देहरादून पहुंचने से बच्चों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी उत्साह है, लेकिन उन्हें इसकी पहली झलक पाने के लिए अभी करीब एक महीने का इंतजार करना पड़ेगा। जू प्रशासन के मुताबिक, किसी भी वन्यजीव को नए वातावरण में लाने के बाद उसे सीधे प्रदर्शन क्षेत्र में रखना सामान्य प्रक्रिया नहीं है। फिलहाल तेजस को पशु चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है, जहां उसकी सेहत, खान-पान और व्यवहार पर नजर रखी जाएगी। पूरी तरह से सहज होने के बाद ही उसे आम जनता के लिए बाड़े में लाया जाएगा। बताया गया है कि संभवतः वाइल्डलाइफ वीक के दौरान बाड़े का उद्घाटन हो सकता है, लेकिन अभी इसकी अंतिम पुष्टि होना बाकी है।

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