सारांश :
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर 2026, रविवार को लगभग 1:30 बजे एक 40-50 साल पुरानी 5 मंजिला इमारत ढह गई। इस हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई और 6 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल हो रही इस इमारत के ढहने के बाद पुलिस ने गुरुग्राम निवासी मकान मालिक आनंद बंसल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। दावे के मुताबिक हादसे के समय इमारत के अंदर 50 से ज्यादा लोग मौजूद थे।
हादसे का पूरा घटनाक्रम और राहत-बचाव कार्य
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे यह बड़ा हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि जिस वक्त हादसा हुआ, उस समय 20-25 कमरों वाले इस हॉस्टल/पीजी के बेसमेंट में खुदाई का काम चल रहा था और छात्र अपने कमरों में मौजूद थे। दावे के मुताबिक हादसे के समय इमारत के अंदर 50 से ज्यादा लोग मौजूद थे।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने हथौड़े आदि से मलबा हटाने की कोशिश शुरू कर दी। सूचना मिलने पर शुरू हुए राहत अभियान के दौरान मलबे से 9 लोगों को बाहर निकाला गया। इस दौरान मलबे में दबे एक छात्र ने अंदर से वीडियो बनाकर मदद की गुहार भी लगाई थी। हादसे के चलते बगल की एक अन्य इमारत पर भी खतरा पैदा हो गया था, जिसे एहतियातन खाली करा लिया गया।
हताहतों का विवरण और वीआईपी प्रतिक्रियाएं
मलबे से निकाले गए 9 लोगों में से 3 की मौत हो चुकी है, जिनमें एक छात्र, एक मजदूर और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल है। अस्पताल में भर्ती 6 घायलों में 4 छात्र (अभिषेक, नीरज, आदित्य व एक अन्य) और 2 मजदूर (असगर अली और अयान) शामिल हैं। घायलों का हालचाल जानने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ितों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की। उधर, पुलिस ने लापरवाही के मामले में गुरुग्राम में रहने वाले मकान मालिक आनंद बंसल के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
छात्र क्षेत्र की स्थिति और दिल्ली में जर्जर इमारतों का आंकड़ा
सत्य निकेतन क्षेत्र वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज जैसे प्रमुख संस्थानों से घिरा हुआ है, जिसके कारण यहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी और हॉस्टलों में रहते हैं। इस इलाके में कई मकानों की स्थिति काफी जर्जर बताई जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में साल 2022 से 2025 के दौरान 3 वर्षों में इमारत गिरने की कुल 1,133 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 98 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।