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उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू का बढ़ा प्रकोप : लखनऊ में 4 नए मरीज मिलने से कुल आंकड़ा 21 पहुंचा

संक्षेप

लखनऊ में 1 सितंबर 2026 (मंगलवार) को स्वाइन फ्लू के 4 नए मामले दर्ज किए गए, जिससे जिले में कुल मरीजों की संख्या 21 हो गई है। अब तक 1 महिला की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नए मरीजों की आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को सतर्क रहने और खुद दवा न लेने की सलाह दी है। नए संक्रमित मरीजों में सर्दी-जुकाम, बुखार और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत देखी गई थी।

नए मामलों की पुष्टि और मरीजों की स्थिति

राजधानी लखनऊ में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को शहर में चार नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इनमें से दो मरीजों की जांच पीजीआई, एक की डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान और एक मरीज की जांच निजी लैब में हुई थी। इसके साथ ही जिले में स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 21 हो चुकी है।

इससे पूर्व स्वाइन फ्लू की चपेट में आने से एक महिला की मृत्यु भी हो चुकी है। नए संक्रमित मरीजों में सर्दी-जुकाम, बुखार और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत देखी गई थी। डॉक्टरों की सलाह पर कराई गई आरटीपीसीआर जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि की गई। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी संक्रमित मरीजों की निगरानी की जा रही है।

सीएमओ डॉ. एनबी सिंह की सलाह और चेतावनियाँ

मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. एनबी सिंह ने आम जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि स्वाइन फ्लू से डरने या घबराने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग पहले से ही कैंसर, किडनी, हृदय रोग या ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। सीएमओ ने लोगों से अपील की है कि लक्षण दिखने पर खुद से दवा लेने या किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति से इलाज कराने से बचें।

इंफ्लूएंजा एच1एन1: कैसे फैलता है संक्रमण?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इंफ्लूएंजा एक सामान्य वायरल बीमारी है जो इंफ्लूएंजा वायरस के कारण होती है और एच1एन1 इसी वायरस का एक प्रकार है, जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। इस वायरस से संक्रमित होने पर आमतौर पर दो से तीन दिनों में लक्षण दिखने लगते हैं। इसका इन्क्यूबेशन पीरियड एक से चार दिन का होता है, जो कुछ मामलों में सात दिनों तक भी बढ़ सकता है।

केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. शीतल वर्मा के अनुसार, एच1एन1 वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खांसने या छींकने के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के माध्यम से फैलता है। इसके अलावा, संक्रमित सतहों को छूने, हाथ मिलाने और हाथों की उचित सफाई न करने से भी इस संक्रमण के फैलने का जोखिम बना रहता है।

संवेदनशील वर्ग और बचाव के मुख्य उपाय

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कुछ विशेष वर्ग के लोगों में इस संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है:

  • गर्भवती महिलाएं
  • रक्त संबंधी बीमारी, डायबिटीज, तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) की बीमारी, कैंसर या एचआईवी से पीड़ित लोग
  • फेफड़े, हृदय, किडनी या लिवर की बीमारी से जूझ रहे मरीज
  • लंबे समय से कॉर्टिसोन जैसी दवाओं का सेवन कर रहे मरीज

संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां:

  • खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को रुमाल या कपड़े से अच्छी तरह ढकें।
  • बातचीत करते समय सामने वाले व्यक्ति से लगभग 1 से 1.5 मीटर की दूरी बनाए रखें।
  • लोगों से हाथ मिलाने से बचें।
  • किसी भी संदिग्ध या संक्रमित वस्तु को छूने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोएं।
  • भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से परहेज करें।
  • बुखार, खांसी या जुकाम जैसे लक्षण दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय तत्काल डॉक्टर की सलाह लें।
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