संक्षिप्त समाचार:
दूरसंचार विभाग ने एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी है कि फर्जी आईडी से सिम लेने, अपनी सिम दूसरों को देने या मोबाइल का IMEI बदलने पर 3 साल की जेल और ₹50 लाख तक का जुर्माना होगा। छत्तीसगढ़ में हुए साइबर फ्रॉड के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है। सरकार ने नागरिकों से 'संचार साथी' पोर्टल पर अपने नाम दर्ज सिम की जांच करने की अपील की है। दूरसंचार विभाग ने सभी टेलीकॉम कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे 30 नवंबर 2026 तक अपने सिस्टम को इस सरकारी प्लेटफॉर्म के साथ पूरी तरह जोड़ लें।
छत्तीसगढ़ के साइबर फ्रॉड के बाद दूरसंचार विभाग हुआ सख्त
सोमवार, 21 सितंबर 2026 को जारी की गई नई सरकारी एडवाइजरी के पीछे छत्तीसगढ़ का एक बड़ा मामला है। वहां एक सिम विक्रेता एजेंट ने लोगों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करते हुए, उनकी जानकारी के बिना ही 25 फर्जी सिम एक्टिवेट कर दिए थे। मामले का खुलासा होते ही दूरसंचार विभाग (DoT) ने उस एजेंट को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया। साथ ही, री-वेरिफिकेशन में फेल होने पर उन सभी 25 फर्जी मोबाइल नंबरों को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। इसी घटना के मद्देनजर देश भर में नियमों को और कड़ा किया गया है।
फर्जी सिम, IMEI से छेड़छाड़ और 'म्यूल सिम' पर भारी जुर्माना
विभाग के अनुसार, यदि कोई ग्राहक अपने नाम से सिम खरीदकर उसे किसी और को बेचता है, किराए पर देता है या साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने देता है, तो मूल ग्राहक पर भी पुलिस केस और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा फर्जी डॉक्यूमेंट्स लगाकर सिम लेना या पहचान छिपाकर धोखाधड़ी करना गंभीर अपराध है। जब कोई ठग किसी आईडी प्रूफ से सिम निकलवाता है या पैसे का लालच देकर किसी और की सिम लेकर उससे साइबर अपराध करता है, तो ऐसी सिम को तकनीकी भाषा में 'म्यूल सिम' कहा जाता है।
एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मोबाइल के IMEI नंबर के साथ छेड़छाड़ करना गैर-कानूनी है। साथ ही, किसी ऐप या वेबसाइट के जरिए कॉलिंग आईडी बदलकर (किसी और का नंबर दिखाकर कॉल करना) बात करना भी अपराध है, जिसे सरकार ने देश की सुरक्षा और नेटवर्क के लिए बड़ा खतरा बताया है। इन सभी अपराधों में 3 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
एक आईडी पर अधिकतम 9 सिम की लिमिट, ऐसे करें चेक
सरकार ने सभी आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे 'संचार साथी' पोर्टल या ऐप पर जाकर तुरंत चेक करें कि उनके दस्तावेजों पर कोई अनजान नंबर तो एक्टिव नहीं है। भारत में नियम के अनुसार, एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 सिम कार्ड रख सकता है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में सुरक्षा कारणों से यह नियम अलग है, जहाँ एक व्यक्ति अधिकतम 6 सिम कार्ड ही ले सकता है।
30 नवंबर 2026 तक टेलीकॉम कंपनियों को मिला अल्टीमेटम
नियमों को जमीनी स्तर पर और सख्त बनाने के लिए सरकार ने 23 अगस्त से 'डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म' (DIP) में एक नया फीचर जोड़ दिया है। इस पोर्टल पर देश के सभी मोबाइल यूजर्स का डेटा मौजूद है। अब यदि कोई व्यक्ति तय सीमा (9 सिम) से ज्यादा सिम लेता है, तो उसकी फोटो सीधे इस पोर्टल पर दिखने लगेगी। इससे सिम बेचने वाले डीलर तुरंत पहचान जाएंगे और नया सिम देने से मना कर देंगे। दूरसंचार विभाग ने सभी टेलीकॉम कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे 30 नवंबर 2026 तक अपने सिस्टम को इस सरकारी प्लेटफॉर्म के साथ पूरी तरह जोड़ लें। तब तक कंपनियों को अपनी पूरी प्रक्रिया दुरुस्त करनी होगी ताकि कोई भी अतिरिक्त या फर्जी सिम चालू न हो सके।
