28, 29 और 30 सितंबर 2026 को होने वाली तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल फिलहाल टल गई है। इस हड़ताल में देश की 7 प्रमुख बैंक यूनियनों के 90% से अधिक कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना थी। 27 सितंबर की रात इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बीच हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। इसमें 5-डे वर्किंग की मांग पर एक हाई लेवल कमेटी बनाने पर सहमति बनी है, जिससे ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है।
बैंक ग्राहकों को बड़ी राहत: 3 दिन की प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल रद्द
सोमवार, 28 सितंबर से शुरू होने वाली तीन दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल स्थगित कर दी गई है। इस हड़ताल में देश की 7 प्रमुख बैंक यूनियनों (AIBEA, AIBOC, NCBE, AIBOA, BEFI, INBEF और INBOC) के 90% से अधिक कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना थी। हड़ताल टलने के कारण अब बैंक शाखाओं में कैश जमा-निकासी, चेक से जुड़े काम, ड्राफ्ट और अन्य सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी और ग्राहकों को किसी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
देर रात बनी सहमति: IBA और UFBU की बैठक में लिया गया कमेटी बनाने का फैसला
बैंक यूनियनों द्वारा मुख्य रूप से 5-डे वर्किंग (सोमवार से शुक्रवार काम और शनिवार-रविवार छुट्टी) की मांग की जा रही थी। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए रविवार, 27 सितंबर की रात करीब 9:30 बजे बैंक प्रबंधन का प्रतिनिधित्व करने वाले इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) और कर्मचारी यूनियनों के संयुक्त मंच (UFBU) के बीच बैठक हुई। इस बैठक में 5-डे वर्किंग लागू करने का अंतिम निर्णय तो नहीं हुआ, लेकिन छुट्टियों की इस मांग पर विचार करने के लिए एक हाई लेवल कमेटी बनाने पर सहमति बन गई है।
10 साल बाद रविवार को खुले बैंक: हड़ताल के संभावित असर के कारण लिया गया था निर्णय
सोमवार से प्रस्तावित हड़ताल के कारण संभावित परेशानी को देखते हुए, वित्त मंत्रालय के निर्देश पर आम जनता के लिए रविवार को भी बैंक खोले गए थे। पिछले एक दशक में यह पहला मौका था जब रविवार को बैंकों में कामकाज हुआ। इससे पहले, वर्ष 2016 में नोटबंदी के समय 14 नवंबर को पुराने 500 और 1000 के नोट बदलने और भारी भीड़ को संभालने के लिए सरकार ने रविवार को बैंक खोलने का फैसला लिया था।
5-डे वर्किंग और PLI स्कीम पर विवाद: मीडिया रिपोर्ट्स में सरकार के रुख पर दावा
5-डे वर्किंग के साथ-साथ परफॉरमेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को लेकर भी बैंक यूनियंस और सरकार आमने-सामने हैं। सरकार ने स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए एक नया नियम लागू किया है, जिसके तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले अफसरों को 365 दिन की बेसिक सैलरी के बराबर इंसेंटिव या बोनस मिल सकता है, जिसका यूनियंस विरोध कर रही हैं। कथित तौर पर सरकार इस बैठक में सीधे शामिल नहीं थी, लेकिन IBA इस मुद्दे पर सरकार के सामने प्रस्ताव रखेगा। इसके अलावा, मीडिया रिपोर्ट्स में वित्त मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है कि सरकार ने कभी भी 5-डे वर्किंग का वादा नहीं किया था और सैलरी रिवीजन की बातचीत में भी यह मुद्दा नहीं उठा था। मंत्रालय के अनुसार, यह मांग कर्मचारी यूनियनों द्वारा एकतरफा उठाई गई थी।
