संक्षेप
केंद्रीय पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को ग्रामीण इलाकों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर रिफिल बुकिंग का 45 दिन का नियम समाप्त करने की घोषणा की है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरी इलाकों की तरह 25 दिन में सिलेंडर बुक किया जा सकेगा। सरकार के अनुसार एलपीजी सप्लाई में सुधार और पेंडिंग बुकिंग कम होने के बाद ऑयल कंपनियों को यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्र सरकार का फैसला: गांव और शहर में एलपीजी बुकिंग के नियम हुए समान
केंद्र सरकार ने ग्रामीण इलाकों के घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। अब गांवों में भी लोग शहरी क्षेत्रों की तर्ज पर 25 दिन के अंतराल में अपना गैस सिलेंडर बुक करा सकेंगे। केंद्रीय पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने सभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को इस नए नियम को तुरंत प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री ने एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों में हुए बदलाव का आधिकारिक नोटिफिकेशन सोशल मीडिया पर भी साझा किया है।
ईरान जंग के समय लगी थी पाबंदी, सप्लाई सुधरने पर वापस लिया गया नियम
केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जंग के दौरान देश में एलपीजी की आपूर्ति पर काफी दबाव बन गया था। इसी स्थिति को देखते हुए 9 मार्च 2026 को शहरी क्षेत्रों में रिफिल बुकिंग का अंतर 25 दिन तय किया गया था, जबकि 12 मार्च 2026 को ग्रामीण इलाकों के लिए इसे बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया था। हालांकि, अब एलपीजी की मौजूदा आपूर्ति स्थिति में काफी सुधार हुआ है और पेंडिंग बुकिंग की संख्या में भारी कमी आई है। इसी वजह से केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों पर लगी इस पाबंदी को हटाने का निर्णय लिया है।
कॉमर्शियल और 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी
नियमों में ढील देने के साथ ही कमर्शियल गैस सिलेंडर की दरों में बदलाव दर्ज किया गया है। 1 सितंबर को तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹11.50 का इजाफा किया है। इसके अलावा, 5 किलोग्राम क्षमता वाला छोटा सिलेंडर भी ₹2 महंगा हो गया है, जिसकी कीमत अब बढ़कर ₹764 हो गई है।
कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट चलाने वालों का संचालन खर्च बढ़ जाएगा, जिससे आम जनता के लिए चाय, समोसा और नाश्ता महंगा होने की संभावना है। वहीं, कैटरिंग सेवा की लागत बढ़ने से शादी-विवाह और आयोजनों में खाने-पीने के इंतजाम भी पहले के मुकाबले थोड़े महंगे हो सकते हैं।
