सारांश :
सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में संशोधन किया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। अब 1 से 2 साल की देरी पर डीएम या एसडीएम और 2 साल से अधिक की देरी पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। व्यवस्था के तहत 0 से 21 दिन के भीतर प्रमाण पत्र बनवाना निशुल्क है। वहीं, 21 दिन के बाद आवेदन करने वालों के लिए पहले 20 रुपये शुल्क निर्धारित था, जिसे करीब दो महीने पहले बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है।
1 अक्टूबर से बदल जाएगी पंजीकरण की व्यवस्था
केंद्र सरकार द्वारा जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में किए गए बड़े संशोधन के बाद, अब प्रमाण पत्र बनवाने में ढिलाई बरतना लोगों को भारी पड़ सकता है। यह नई व्यवस्था आगामी 1 अक्टूबर से लागू होने जा रही है। नए नियमों के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना 1 साल के बाद लेकिन 2 साल के भीतर दी जाती है, तो पंजीकरण के लिए संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या डीएम द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। मजिस्ट्रेट द्वारा सत्यता का सत्यापन किए जाने और निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद ही पंजीकरण हो सकेगा।
2 साल से अधिक की देरी पर जाना होगा कोर्ट
सबसे बड़ा बदलाव दो साल से पुराने मामलों को लेकर किया गया है। यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो साल बाद दी जाती है, तो अब बिना कोर्ट के आदेश के प्रमाण पत्र नहीं बनेगा। इसके लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश लाना होगा, जिसके बाद सत्यापन और शुल्क अदायगी की प्रक्रिया पूरी होगी। अधिनियम में स्पष्ट किया गया है कि कार्यपालक मजिस्ट्रेट का अर्थ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 14(1) के तहत नियुक्त मजिस्ट्रेट से है। गौरतलब है कि अभी तक दो साल से अधिक पुराने मामलों में भी एसडीएम के स्तर से ही आदेश हो जाया करता था।
पंजीकरण शुल्क में पहले ही हो चुका है इजाफा
लखनऊ सहित देशभर में पिछले लगभग 10 सालों से केंद्र सरकार के एकीकृत पोर्टल के जरिए जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासन ने 19 जून को एक आदेश जारी कर इसके शुल्क में भी वृद्धि कर दी थी। व्यवस्था के तहत 0 से 21 दिन के भीतर प्रमाण पत्र बनवाना निशुल्क है। वहीं, 21 दिन के बाद आवेदन करने वालों के लिए पहले 20 रुपये शुल्क निर्धारित था, जिसे करीब दो महीने पहले बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है।
अधिकारियों ने दिया आदेश के अनुपालन का निर्देश
नए नियमों को लेकर स्थानीय प्रशासन भी मुस्तैद हो गया है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी पीके श्रीवास्तव ने बताया कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए देरी से आने वाले आवेदनों के संबंध में शासन ने जो भी नया आदेश जारी किया है, उसका पूरी तरह से अनुपालन किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दो साल से अधिक देरी के मामलों में अब अनिवार्य रूप से न्यायिक मजिस्ट्रेट से आदेश कराना होगा।