सारांश :
बुधवार को गोरखपुर में सीएम योगी ने दावा किया कि अगले 6 महीने में विधानसभा चुनाव से पहले 1 लाख सरकारी नौकरियां दी जाएंगी, जिसकी प्रक्रिया इसी महीने, 19 सितंबर से शुरू होगी। उधर, लखनऊ में मंत्री ओपी राजभर ने 57 हजार पंचायत सहायकों का मानदेय 6,000 से बढ़ाकर 9,000 रुपये करने की घोषणा की, साथ ही अब कोई भी ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव अपनी मर्जी से किसी पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेगा। सेवा समाप्त करने से पहले डीएम के नेतृत्व वाली कमेटी जांच करेगी।
गोरखपुर में सीएम योगी की बड़ी घोषणा: 19 सितंबर से 1 लाख नौकरियों की शुरुआत
बुधवार को गोरखपुर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं के लिए बड़ा ऐलान किया। उनके अनुसार, अगले 6 महीने में विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले प्रदेश में 1 लाख लोगों को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इस पर काम 19 सितंबर से शुरू किया जा रहा है और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के विज्ञापन पहले ही जारी हो चुके हैं। सीएम ने दावा किया कि उनकी सरकार इससे पहले साढ़े 9 लाख नौकरियां दे चुकी है। पूर्व की सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 2017 से पहले जब नौकरी निकलती थी, तो कथित तौर पर 'सैफई सिंडिकेट' वसूली पर निकल पड़ता था। युवाओं को मजबूरन कोर्ट जाना पड़ता था और पूरी प्रक्रिया में लूट-खसोट हावी थी।
आईएमए ब्लड सेंटर और कल्याण मंडपम का लोकार्पण: यूपी को बताया दंगा मुक्त
गोरखपुर दौरे में सीएम योगी ने दो प्रमुख कार्यक्रमों में शिरकत की। सुबह उन्होंने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यूपी में इंसेफेलाइटिस का खात्मा माफियाओं और मच्छरों की तरह कर दिया गया है। आज 75 जिलों में 85 मेडिकल कॉलेज हैं। वहीं, शाम 4 बजे उन्होंने गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) द्वारा 3 करोड़ 9 लाख रुपये की लागत से बनाए गए 'कल्याण मंडपम' का उद्घाटन किया। इसके ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर के हॉल में 300 लोगों के बैठने की क्षमता है और इसे सस्ते दामों में बुक किया जा सकेगा। सुरक्षा का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि आज यूपी कर्फ्यू और दंगा मुक्त है। रामगढ़ताल की सुंदरता का उदाहरण देते हुए उन्होंने पिछली सपा-कांग्रेस सरकारों की कथित गंदी मानसिकता को गोरखपुर की पिछली दुर्दशा का कारण बताया।
57 हजार पंचायत सहायकों को तोहफा: मानदेय 6 हजार से बढ़कर 9 हजार हुआ
दूसरी तरफ, लखनऊ में पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंचायत सहायकों के लिए बड़े फैसलों की घोषणा की। सीएम योगी से बातचीत के बाद लिए गए निर्णय के अनुसार, प्रदेश के 57 हजार पंचायत सहायकों के मानदेय में 3 हजार रुपये (50%) की वृद्धि की गई है। अब उन्हें 6 हजार की जगह 9 हजार रुपये मिलेंगे। साथ ही, अब मानदेय ग्राम प्रधान के बजाय सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खाते में भेजा जाएगा। पंचायत सहायकों को अब कैशलेस इलाज की सुविधा और महिला सहायकों को मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) का लाभ भी मिलेगा।
नई संरक्षण नीति: बिना डीएम की जांच के नहीं हटा सकेंगे ग्राम प्रधान
मंत्री राजभर ने स्पष्ट किया कि अब कोई भी ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव अपनी मर्जी से किसी पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेगा। सेवा समाप्त करने से पहले डीएम के नेतृत्व वाली कमेटी जांच करेगी। इसके अलावा, धरना-प्रदर्शन के दौरान पंचायत सहायकों पर दर्ज किए गए मुकदमे वापस लिए जाएंगे और जिन सहायकों को हटाया गया था, उन्हें बहाल किया जाएगा।
7 सितंबर से चल रहा धरना खत्म: 5 में से 4 मांगें हुईं पूरी
सरकार के इस फैसले की खबर मिलते ही 7 सितंबर से लखनऊ के ईको गार्डन में धरना दे रहे पंचायत सहायकों ने खुशी जताते हुए अपना प्रदर्शन खत्म कर दिया और एक घंटे के भीतर धरनास्थल खाली कर दिया। पंचायत सहायकों की 5 प्रमुख मांगें थीं, जिनमें से सरकार ने 4 (मानदेय वृद्धि, सीधे खाते में पैसा, जांच के बाद निष्कासन और मुकदमे वापसी) मान ली हैं। हालांकि, संविदा की जगह स्थायी करने की मांग को सरकार ने अभी स्वीकार नहीं किया है। गौरतलब है कि 14 सितंबर को सहायकों से मुलाकात के दौरान मंत्री राजभर ने 20 से 25 हजार रुपये मानदेय देने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया था और काम में लापरवाही का मुद्दा उठाया था।