संक्षेप
नई दिल्ली में ऑनलाइन पेमेंट कंपनियों ने 15 सितंबर 2026 तक दुकानदारों की री-केवाईसी (Re-KYC) पूरा करने की समयसीमा बढ़ाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से अपील की है। डेडलाइन न बढ़ने पर लगभग 10 लाख छोटे ऑनलाइन कारोबारियों और 30-35% रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों के डिजिटल पेमेंट ब्लॉक होने का खतरा है। पेटीएम और फोनपे जैसी कंपनियों के पास छोटे शहरों एवं गांवों में लाखों साउंड बॉक्स और QR स्टैंडी लगे हुए हैं। इनमें से कई रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के पास पूरे पक्के दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
10 लाख कारोबारियों और 35% छोटे विक्रेताओं पर मंडराया संकट
पेमेंट एग्रीगेटर कंपनियों ने रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से दुकानदारों और मर्चेंट्स के री-केवाईसी की 15 सितंबर की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि यह समयसीमा नहीं बढ़ाई जाती है, तो लाखों मर्चेंट अकाउंट्स अस्थायी रूप से ब्लॉक किए जा सकते हैं। इससे दुकानों, ठेलों और ऑनलाइन खरीदारी के दौरान ग्राहकों को UPI या कार्ड द्वारा भुगतान करने में बड़ी रुकावट आ सकती है।
आंकड़ों के मुताबिक, QR कोड का इस्तेमाल करने वाले लगभग 30% से 35% छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों के प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा करीब 10 लाख छोटे ऑनलाइन व्यवसायों का पेमेंट सिस्टम भी बंद हो सकता है। हालांकि, इससे देश के ओवरऑल डिजिटल पेमेंट वॉल्यूम पर बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन आम जनता की दैनिक खरीदारी और छोटे कारोबारियों की बिक्री पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
वेरिफिकेशन प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक दिक्कतें और कर्मचारी कमी
उल्लेखनीय है कि RBI ने सितंबर 2025 में ही पेमेंट कंपनियों के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की थीं और इसके लिए एक साल की अवधि दी गई थी। अंतिम समय तक कार्य टालने की आदत और कड़े नियमों के कारण यह भारी बैकलॉग जमा हो गया। पेटीएम और फोनपे जैसी कंपनियों के पास छोटे शहरों एवं गांवों में लाखों साउंड बॉक्स और QR स्टैंडी लगे हुए हैं। इनमें से कई रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के पास पूरे पक्के दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अलावा, नियम के अनुसार वेरिफिकेशन का काम पेमेंट कंपनी के अपने पक्के कर्मचारी ही कर सकते हैं, इसे किसी बाहरी प्राइवेट एजेंसी को नहीं सौंपा जा सकता। कंपनियों द्वारा नए कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद दुकानदारों की विशाल संख्या के मुकाबले स्टाफ कम पड़ रहा है और मौके पर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करना कठिन साबित हो रहा है।
धोखाधड़ी रोकने की पहल और कंपनियों को राहत की उम्मीद
री-केवाईसी (Re-KYC) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत मर्चेंट्स के पहचान पत्र, पते और बिजनेस डिटेल्स की दोबारा जांच की जाती है, ताकि वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े और काले धन के लेन-देन को रोका जा सके।
पेमेंट कंपनियों का मानना है कि वे 15 सितंबर की निर्धारित समयसीमा तक केवल 80% वेरिफिकेशन कार्य ही पूरा कर पाएंगी, जबकि शेष 20% काम के लिए और समय की आवश्यकता होगी। पेमेंट इंडस्ट्री को उम्मीद है कि रिज़र्व बैंक इन व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए समयसीमा में राहत देगा, जिससे देश का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलता रहे।