सारांश :
नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर एंबुलेंस सेवा के विस्तार का ऐलान किया। इस योजना के तहत देश के हर टोल प्लाजा पर राज्य सरकारों के माध्यम से एंबुलेंस संचालित की जाएगी, जिसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। इन एंबुलेंस को आपातकालीन नंबर 112 से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में एनएचएआइ (NHAI) केयर के तहत लगभग 3,000 एंबुलेंस संचालित हो रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में सड़क हादसों में करीब 1.83 लाख लोगों की जान चली गई थी।
देश के हर टोल प्लाजा पर 24 घंटे तैनात रहेगी एंबुलेंस
सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को तुरंत इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपातकालीन चिकित्सा सेवा का दायरा बढ़ाने जा रही है। वर्तमान में एनएचएआइ (NHAI) केयर के तहत लगभग 3,000 एंबुलेंस संचालित हो रही हैं। अब सरकार की योजना देश के सभी टोल प्लाजा पर चौबीसों घंटे एंबुलेंस तैनात करने की है।
मंत्रालय के अनुसार, देश में करीब 1,200 टोल प्लाजा हैं, जिनमें से फिलहाल 500 पर एंबुलेंस की तैनाती है। बाकी बचे सभी टोल प्लाजा के लिए भी केंद्र सरकार एंबुलेंस उपलब्ध कराएगी। जिन इलाकों में मल्टीलेन फ्री फ्लो के कारण टोल गेट नहीं हैं, वहां राज्य सरकारें जरूरत के हिसाब से इनकी तैनाती करेंगी।
केंद्र सरकार देगी वाहन और उठाएगी संचालन का पूरा खर्च
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर के अनुसार, टोल प्लाजा पर तैनात की जाने वाली एंबुलेंस का संचालन राज्य की आपातकालीन सेवा के तहत होगा। हालांकि, वाहनों को उपलब्ध कराने और उनके संचालन का पूरा वित्तीय खर्च केंद्र सरकार ही वहन करेगी। जल्द ही इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
राज्यों के लिए यह अनिवार्य शर्त होगी कि उन्हें इन एंबुलेंस को अपने आपातकालीन टोल-फ्री नंबर 112 से एकीकृत (इंटीग्रेट) करना होगा। साथ ही, बेहतर समन्वय के लिए इन्हें 'एनएचएआइ केयर' सिस्टम से भी जोड़ा जाएगा, ताकि घायलों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंच सके।
10 मिनट में मदद पहुंचाकर जिंदगियां बचाने का लक्ष्य
देश में नेशनल हाईवे का कुल नेटवर्क लगभग 1.46 लाख किलोमीटर का है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में सड़क हादसों में करीब 1.83 लाख लोगों की जान चली गई थी।
संसद के पिछले सत्र में मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि यदि राज्य सरकारें दुर्घटनास्थल पर 10 मिनट के भीतर एंबुलेंस पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं, तो केंद्र उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। सरकार का मुख्य प्रयास दुर्घटना के बाद 'गोल्डन आवर' में मरीज को अस्पताल पहुंचाकर अधिक से अधिक लोगों की जान बचाना है।