संक्षिप्त समाचार
उत्तराखंड में नदियों का जलस्तर घटने और केंद्रीय पूल से पर्याप्त आपूर्ति न मिलने के कारण गंभीर बिजली संकट पैदा हो गया है। यूपीसीएल के एमडी पीसी ध्यानी ने 24 सितंबर 2026 (बृहस्पतिवार) को प्रेस वार्ता में बताया कि पीक टाइम में 10 रुपये प्रति यूनिट की दर पर भी बाजार से बिजली नहीं मिल पा रही है। स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त बिजली की मांग की गई है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश में गैस आधारित पावर प्लांट का संचालन भी शुरू किया गया है, हालांकि इस प्लांट के पास केवल पांच दिनों का ही गैस बैकअप उपलब्ध है।
मांग और आपूर्ति का बढ़ा अंतर, बाजार में बिजली का अभाव
उत्तराखंड में बिजली की मांग के सापेक्ष उपलब्धता काफी कम होने के कारण विद्युत व्यवस्था पर भारी दबाव बन गया है। प्रदेश में नदियों का जल स्तर घटने की वजह से उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) के बिजली उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही केंद्रीय पूल से भी राज्य को अपेक्षा के अनुरूप बिजली प्राप्त नहीं हो पा रही है।
उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) के प्रबंध निदेशक (MD) पीसी ध्यानी ने बृहस्पतिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि स्थिति इतनी गंभीर है कि पीक आवर्स के दौरान बाजार में 10 रुपये प्रति यूनिट की अधिकतम दर देने पर भी बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
केंद्र से मदद की गुहार और गैस आधारित प्लांट से सीमित बैकअप
बिजली संकट से निपटने के लिए यूपीसीएल प्रशासन ने केंद्र सरकार से संपर्क साधा है। केंद्र सरकार को गैर-आवंटित कोटे से राज्य को अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा गया है। इसके अलावा, आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश में गैस आधारित पावर प्लांट का संचालन भी शुरू किया गया है, हालांकि इस प्लांट के पास केवल पांच दिनों का ही गैस बैकअप उपलब्ध है।
एमडी पीसी ध्यानी के अनुसार, देश के कई अन्य राज्यों में भी इस समय बिजली की कमी बनी हुई है। इसके बावजूद उत्तराखंड में फिलहाल अन्य राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत कम कटौती की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली कटौती के दौरान उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां बिजली चोरी की शिकायतें या दरें अधिक हैं।
रोस्टिंग के दौरान ही होगा मेंटेनेंस और सौर ऊर्जा से बैकअप योजना
एमडी ने विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि बिजली लाइनों और नेटवर्क के रख-रखाव (मेंटेनेंस) का कार्य केवल निर्धारित रोस्टिंग यानी कटौती के समय के दौरान ही पूरा किया जाए, ताकि जनता को बार-बार बिजली कटौती का सामना न करना पड़े। वर्तमान में प्रदेश भर में निर्माण और अंडरग्राउंड केबलिंग का काम भी जारी है।
इसके साथ ही, बिजली आपूर्ति को संतुलित करने के लिए एक नई रणनीति पर काम किया जा रहा है। यूपीसीएल ने यूजेवीएनएल से अनुरोध किया है कि जिस समय सौर ऊर्जा (सोलर पावर) उपलब्ध रहती है, उस दौरान हाइड्रो पावर (जल विद्युत) उत्पादन को रोककर बैकअप में रखा जाए। इस प्रक्रिया से करीब 2 घंटे 30 मिनट का अतिरिक्त पावर बैकअप तैयार किया जा सकेगा, जिससे व्यस्त समय में बिजली कटौती की अवधि को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।