लोड किया जा रहा...

उत्तराखंड में ₹1 लाख स्टाइपेंड की मांग को लेकर 600 PG डॉक्टर हड़ताल पर : अस्पतालों में OPD और रूटीन ऑपरेशन ठप

सारांश :

उत्तराखंड के देहरादून, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में करीब 600 PG रेजिडेंट डॉक्टर ₹1 लाख प्रति माह स्टाइपेंड की मांग को लेकर कार्यबहिष्कार पर हैं। देश के कई अन्य राज्यों में PG डॉक्टरों को इससे अधिक मानदेय दिया जा रहा है। सोमवार को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में हड़ताल छठे दिन भी जारी रही। डॉक्टरों के इस आंदोलन से OPD और रूटीन ऑपरेशन प्रभावित होने से दूर-दराज से आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

10 साल से नहीं बढ़ा मानदेय, ₹1 लाख स्टाइपेंड की मांग

उत्तराखंड के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों—देहरादून, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और श्रीनगर के लगभग 600 PG रेजिडेंट डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर कार्यबहिष्कार शुरू कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि राज्य में पिछले 10 वर्षों से उनके स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

वर्तमान में PG डॉक्टरों को प्रति माह लगभग ₹62 हजार स्टाइपेंड दिया जा रहा है। आंदोलनकारी डॉक्टरों के अनुसार, काम के भारी दबाव, जिम्मेदारियों और प्रशिक्षण के दौरान होने वाले खर्चों की तुलना में यह राशि काफी कम है। डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि उनके स्टाइपेंड को बढ़ाकर कम से कम ₹1 लाख प्रति माह किया जाए। उनका तर्क है कि देश के कई अन्य राज्यों में PG डॉक्टरों को इससे अधिक मानदेय दिया जा रहा है, इसलिए उत्तराखंड में भी इसे तुरंत बढ़ाया जाना चाहिए।

OPD और रूटीन ऑपरेशन प्रभावित, दूर-दराज के मरीज परेशान

रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण अस्पतालों की सामान्य चिकित्सा सेवाएं चरमरा गई हैं। सबसे अधिक प्रभाव हल्द्वानी स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुशीला तिवारी अस्पताल (STH) और प्रदेश के सबसे बड़े दून अस्पताल में देखने को मिल रहा है। सुशीला तिवारी अस्पताल में सोमवार को हड़ताल छठे दिन में प्रवेश कर गई, जिससे OPD सेवाएं और रूटीन जांच प्रक्रियाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।

हड़ताल की वजह से तय तिथियों पर होने वाले रूटीन ऑपरेशनों को टालना पड़ रहा है और मरीजों को आगे की तारीखें दी जा रही हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल कुमाऊं मंडल का प्रमुख चिकित्सा केंद्र है, जहां नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। परामर्श और जांच के लिए मरीजों व उनके तीमारदारों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि, डॉक्टरों ने मरीजों की गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए इमरजेंसी सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा है और आपातकालीन इलाज जारी रखने का दावा किया है।

एक के बाद एक आंदोलन, स्वास्थ्य व्यवस्था पर चौतरफा दबाव

राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एक के बाद एक हो रहे आंदोलनों से स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। PG डॉक्टरों के कार्यबहिष्कार से पहले इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया था, और अब नर्सिंग व पैरामेडिकल छात्र भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।

चारों प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में 600 PG डॉक्टरों के एक साथ हड़ताल पर जाने से अस्पतालों की दैनिक व्यवस्था को संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हड़ताली डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि जब तक शासन से ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक उनका कार्यबहिष्कार जारी रहेगा। वहीं, अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद है कि सरकार और डॉक्टरों के बीच जल्द ही बातचीत से हल निकलेगा, जिससे OPD और ऑपरेशन सेवाएं पुनः सामान्य हो सकेंगी।

उत्तर प्रदेश (UP)
उत्तराखंड (UK)
पीछे जाएं
नमस्‍कार,
यूज़र
कोई ज़िला नहीं चुना
ज़िला बदलें
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मैसेज करें
पोस्टर बनाएं
सभी कैटेगरी
आपकी सेव की गई ख़बरें
ख़बरों का फ़ॉन्ट साइज़ (Font Size)

प्रोफ़ाइल संपादित करें

पीछे जाएं

यह है सैंपल हेडलाइन (Sample Title)

यह है सैंपल कंटेंट टेक्स्ट जिसे आप छोटा या बड़ा करके देख सकते हैं।

सबसे ज्यादा यूजर्स द्वारा चुना गया और सबसे बेहतर अनुभव देने वाला फ़ॉन्ट साइज़ 3 है।
छोटा
1
2
3
4
5
बड़ा
पीछे जाएं
पीछे जाएं

आपके लिए

लॉगिन करें
या (Or)
लॉगिन करने से आप हमारी नियम व शर्तें और प्राइवेसी पॉलिसी से सहमत होते हैं।
आपकी प्रोफ़ाइल