उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने छात्राओं की शिक्षा को निर्बाध बनाने के लिए स्कूलों में एमएचएम (मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन) कॉर्नर स्थापित करने और नि:शुल्क सेनेटरी पैड देने की पहल की है। डॉ. जया ठाकुर बनाम केंद्र सरकार के मामले के परिप्रेक्ष्य में, 13 और 14 अगस्त 2026 को कार्यशाला के जरिए राज्य के सभी 75 जिलों के लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं। राज्य स्तर पर तैयार किए गए ये मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जिलों में वापस जाकर सभी विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
छात्राओं की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए एमएचएम कॉर्नर की स्थापना
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार, यह सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है कि स्वास्थ्य या मासिक धर्म की वजह से किसी भी बेटी की पढ़ाई बाधित न हो। इसके तहत प्रदेश के सभी विद्यालयों को छात्राओं के लिए अधिक सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण वाला स्थान बनाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, विद्यालयों में एमएचएम (मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन) कॉर्नर स्थापित किए जा रहे हैं, जहां से छात्राओं को नि:शुल्क सेनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही उन्हें मासिक धर्म के बारे में वैज्ञानिक जानकारी भी दी जाएगी।
75 जिलों में तैयार हो रहे मास्टर ट्रेनर, 13-14 अगस्त को कार्यशाला
मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े विषयों पर शिक्षकों की समझ और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं। राज्य स्तर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में हर जिले से तीन नामित प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को पहले दिन 37 जिलों के 111 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। इनमें अंबेडकर नगर, अमेठी, औरैया, अयोध्या, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बांदा, गाजियाबाद, गोंडा और गोरखपुर आदि जिलों के प्रतिभागी शामिल रहे। शेष जिलों के 112 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण 14 अगस्त को आयोजित किया जाएगा।
डॉ. जया ठाकुर बनाम केंद्र सरकार प्रकरण का प्रभाव
यह व्यापक पहल डॉ. जया ठाकुर बनाम केंद्र सरकार व अन्य के प्रकरण में विद्यालयों के भीतर मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में की जा रही कवायद का हिस्सा है। प्रशिक्षण में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य को केवल सेनेटरी पैड बांटने तक सीमित न रखा जाए। इसके बजाय इसे सुरक्षित टॉयलेट, पानी, साबुन, पैड के उचित निस्तारण, गोपनीयता, जागरूकता और एक सहयोगी वातावरण से जोड़ा जाए। इस पूरी व्यवस्था को बालिकाओं की गरिमा, शिक्षा और उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।
जिले स्तर पर सभी शिक्षकों को दिया जाएगा ऑनलाइन प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि सरकारी, निजी, ग्रामीण और शहरी सभी प्रकार के विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों। राज्य स्तर पर तैयार किए गए ये मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जिलों में वापस जाकर सभी विद्यालयों के महिला व पुरुष शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि समाज और स्कूलों में ऐसा अनुकूल माहौल बने जिससे मासिक धर्म के कारण किसी भी छात्रा की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।