देश में चीनी की रिकॉर्ड कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार अक्टूबर सीजन से एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित कर सकती है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश से उत्पादन घटने की आशंका है। सरकार के इस कदम से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ेगी, जबकि एथेनॉल निर्माण के लिए गन्ने की जगह मक्के और चावल को विकल्प बनाया जाएगा। पिछले सीजन में चीनी मिलों ने कुल उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत, यानी करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी एथेनॉल के लिए डायवर्ट की थी।
एथेनॉल डायवर्जन रोककर 30 लाख मीट्रिक टन सप्लाई बढ़ाने की तैयारी
देश में चीनी की कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर को छू रही हैं। घरेलू आपूर्ति में सुधार और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार अक्टूबर सीजन से एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के उपयोग को सीमित करने पर विचार कर रही है। पिछले सीजन में चीनी मिलों ने कुल उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत, यानी करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी एथेनॉल के लिए डायवर्ट की थी। यदि इस डायवर्जन पर रोक लगती है, तो इतनी ही मात्रा में अतिरिक्त चीनी घरेलू बाजार में उपलब्ध होगी, जिससे भारत को चीनी आयात नहीं करनी पड़ेगी। इस अहम मामले पर अंतिम फैसला अगले महीने के अंत तक आने की उम्मीद है।
कम बारिश और त्योहारी मांग से कीमतों में आया 10% का उछाल
सरकारी और उद्योग से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों, महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश दर्ज की गई है। इस वजह से अगले साल चीनी उत्पादन में गिरावट का संकट मंडरा रहा है। उत्पादन घटने की स्थिति में सरकार एथेनॉल के बजाय चीनी की सप्लाई को प्राथमिकता देना चाहती है। पिछले एक महीने के भीतर ही भारतीय बाजार में चीनी के दाम लगभग 10% बढ़ चुके हैं। आगामी त्योहारी सीजन में यात्राओं और आवाजाही के कारण चीनी की मांग में और तेजी आने का अनुमान है। सप्लाई में कमी और भारी मांग के कारण अगले तीन महीनों तक कीमतें उच्च स्तर पर ही बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
गन्ने की जगह मक्का और चावल से बनेगा एथेनॉल
सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग के अपने 20% के लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहती है। गन्ने से बनने वाले एथेनॉल में होने वाली कटौती की भरपाई के लिए अब मक्का और चावल के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। राहत की बात यह है कि देश में फिलहाल मक्का और चावल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। नवंबर से शुरू होने वाले नए मार्केटिंग वर्ष के लिए चीनी उद्योग का एथेनॉल एलोकेशन सीजन शुरू होने से पहले तय कर लिया जाएगा। इसके बाद सरकारी तेल कंपनियां एथेनॉल खरीद का टेंडर जारी करेंगी। गौरतलब है कि सरकार पहले ही चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगा चुकी है और पिछले महीने व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा भी लागू कर दी गई थी।
मिलों को केवल 'सी-हेवी मोलासेस' इस्तेमाल करने की मिलेगी इजाजत
मामले की सीधी जानकारी रखने वाले सूत्रों का दावा है कि चीनी मिलों को अब गन्ने के जूस और 'बी-हेवी मोलासेस' से एथेनॉल बनाने की मनाही होगी। बी-हेवी मोलासेस चीनी बनाने की प्रक्रिया का वह शुरुआती बाय-प्रोडक्ट है, जिसमें चीनी की मात्रा अधिक होती है। अब मिलों को मुख्य रूप से 'सी-हेवी मोलासेस' से ही एथेनॉल बनाने की अनुमति मिलेगी। यह वह आखिरी गाढ़ा शीरा होता है, जिसमें से अधिकांश चीनी पहले ही निकाली जा चुकी होती है और चीनी की मात्रा नाममात्र रह जाती है। उद्योग अधिकारियों के अनुसार, इस नए प्रतिबंध से चीनी मिलों की कमाई पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि मौजूदा समय में एथेनॉल बनाने की तुलना में गन्ने से चीनी बनाकर बेचने पर मिलों को ज्यादा मुनाफा होने की उम्मीद है।
