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उत्तर प्रदेश में नकली और नशीली दवाओं पर योगी सरकार सख्त : एफएसडीए ने जारी की जांच की नई एसओपी

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने नकली, मिलावटी और नशीली दवाओं के काले कारोबार को खत्म करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। एफएसडीए (FSDA) आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की नई एसओपी के अनुसार, अब दवा दुकान से लेकर निर्माता तक पूरी सप्लाई चेन खंगाली जाएगी। फर्जी लाइसेंस, डमी मालिकों और स्टॉक हेराफेरी पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के साथ बीएनएस-2023 और एनडीपीएस एक्ट में सीधी एफआईआर होगी। छापेमारी में सीसीटीवी डीवीआर, ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट रसीद और बैंक ट्रांजेक्शन खंगाले जाएंगे।




एसओपी जारी: डमी लाइसेंस और छद्म कारोबारियों पर कसेगा शिकंजा

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब द्वारा जारी नई एसओपी के तहत औषधि निरीक्षकों और लाइसेंसिंग अथॉरिटी की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। अब नए थोक लाइसेंस आवेदकों की पृष्ठभूमि की गहन जांच होगी। यदि पहले से अवैध कारोबार में लिप्त कोई व्यक्ति अपने रिश्तेदार (पति, पत्नी, भाई-बहन) या किसी डमी व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस लेने का प्रयास करेगा, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। गंभीर उल्लंघनकर्ताओं को भविष्य में लाइसेंस लेने से पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके अलावा, यदि लाइसेंस किसी महिला या अन्य के नाम पर है और संचालन कोई और कर रहा है, तो लाइसेंस निलंबित या निरस्त कर अभियोजन चलाया जाएगा। आवासीय क्षेत्रों में भी व्यावसायिक गतिविधियों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। बिना लाइसेंस बेसमेंट या किराए के कमरे में दवा रखने पर भी कार्रवाई की जाएगी।

दवा के स्टॉक, बिलिंग सॉफ्टवेयर और डिजिटल रिकॉर्ड्स की होगी गहन पड़ताल

नई व्यवस्था के अनुसार, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक्स, कैंसर और पेन किलर जैसी हाई-वैल्यू दवाओं के वास्तविक स्टॉक का मिलान लेजर से किया जाएगा। गड़बड़ी मिलने पर जांच निर्माता तक पहुंचेगी। असामान्य कीमत पर बिक्री, क्रॉस-बिलिंग या कागजी स्टॉक एडजस्टमेंट मिलने पर दूसरे राज्यों के औषधि निरीक्षकों की मदद से सप्लायर का भौतिक सत्यापन होगा। जांच अब कागजों तक सीमित नहीं रहेगी; बैक डेट बिलिंग, माइनस स्टॉक, डिलीटेड डेटा और दोहरे खातों को पकड़ने के लिए बिलिंग सॉफ्टवेयर भी चेक किए जाएंगे। छापेमारी में सीसीटीवी डीवीआर, ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट रसीद और बैंक ट्रांजेक्शन खंगाले जाएंगे ताकि यह पता चल सके कि वास्तविक भुगतान किसने किया है।

सरकारी दवाओं की कालाबाजारी और नकली उत्पादों पर होगी सीधी एफआईआर

संदिग्ध दवा मिलने पर उसके लेबल, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट, फॉर्मूला और सिक्योरिटी फीचर्स की बारीकी से जांच होगी। नमूने में अंतर या वैध स्रोत न मिलने पर दवा को काउंटरफीट (नकली) मानकर बिक्री रोक दी जाएगी और सैंपल राजकीय विश्लेषक को भेजा जाएगा। रिपोर्ट में नकली होने की पुष्टि पर बीएनएस-2023 के तहत संयुक्त एफआईआर होगी। साथ ही, सरकारी सप्लाई, ईएसआई, डिफेंस सप्लाई या फिजिशियन सैंपल और एक्सपायर्ड दवाओं को दोबारा लेबल लगाकर बेचने वालों पर भी मुकदमा दर्ज कर स्टॉक जब्त किया जाएगा। इंसुलिन और वैक्सीन जैसे कोल्ड चेन उत्पादों के तय तापमान (2 से 8 डिग्री सेल्सियस) में न मिलने पर भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नशीली दवाओं के संगठित नेटवर्क और बिलिंग कॉकस पर होगा प्रहार

विभिन्न जिलों या राज्यों के बीच बिलिंग में गड़बड़ी और फर्मों का 'कॉकस' (आपसी साठगांठ) सामने आने पर पूरे नेटवर्क की एक साथ जांच की जाएगी। गंभीर अनियमितता मिलने पर संबंधित फर्म से दवाओं की खरीद-बिक्री पूरी तरह बंद कराकर स्टॉक को सरकारी कब्जे में लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कोडीन सिरप, पेन किलर और एनडीपीएस (NDPS) श्रेणी की नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। अगर इनके पीछे कोई संगठित नेटवर्क मिलता है, तो कार्रवाई केवल औषधि कानून तक सीमित न रहकर बीएनएस-2023 और एनडीपीएस एक्ट की सुसंगत धाराओं में भी की जाएगी। एफएसडीए ने सभी औषधि निरीक्षकों को बिना देरी किए इन निर्देशों का पालन करने का सख्त आदेश दिया है।

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