सारांश :
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) और NFCSF के अनुसार देश में चीनी की कमी नहीं है। पिछले महीने 20% तक महंगी होकर ₹60/किलो तक पहुंची चीनी की कीमतों को काबू करने के लिए सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है, जिससे त्योहारी सीजन में राहत की उम्मीद है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज ने बताया कि आयातित चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच सकती है।
राहत की खबर: जल्द कम होंगे चीनी के दाम, 15 अक्टूबर तक आ सकती है पहली खेप
त्योहारी सीजन से पहले आम जनता के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने स्पष्ट किया है कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है और जल्द ही खुदरा बाजारों में इसके दाम गिरने की उम्मीद है। पिछले एक महीने में चीनी 20% से ज्यादा महंगी होकर ₹60 प्रति किलो तक पहुंच गई थी। घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन रॉ शुगर (कच्ची चीनी) के बिना सीमा शुल्क आयात (ड्यूटी-फ्री) को मंजूरी दी थी। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के अध्यक्ष प्रकाश नाईकनवरे ने बताया कि आयातित चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच सकती है। चूंकि थाईलैंड खुद चीनी की कमी से जूझ रहा है, इसलिए फिलहाल ब्राजील से ही आयात का एकमात्र विकल्प बचा है।
ब्राजील से आने में लगेगा समय, 31 अक्टूबर की डेडलाइन में छूट संभव
ब्राजील से पानी के जहाजों को भारत आने में करीब 40 से 45 दिन का समय लगता है। यह टाइमलाइन डीजीएफटी की मंजूरी, लेटर ऑफ क्रेडिट और पोर्ट कंजेशन (बंदरगाह पर भीड़) पर भी निर्भर करेगी। सरकार ने ड्यूटी-फ्री आयात के लिए 31 अक्टूबर की डेडलाइन तय की है, लेकिन प्रकाश नाईकनवरे ने दावा किया है कि इसमें छूट मिल सकती है। जो शिपमेंट पहले से रास्ते में होंगे, उन्हें तय तारीख के बाद भी आने की अनुमति मिलने की पूरी संभावना है।
तटीय राज्यों को मिलेगी प्राथमिकता, ऐसे तैयार होगी खाने लायक चीनी
बाहर से आने वाली आयातित रॉ शुगर सबसे पहले महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों को मिलेगी। इसके बाद बंदरगाहों से रेल या सड़क मार्ग के जरिए इसे उत्तर भारत के लैंडलॉक्ड राज्यों तक पहुंचाया जाएगा। गौरतलब है कि ब्राजील से आने वाली इस रॉ शुगर का सीधे तौर पर खाने में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे देश की रिफाइनरियों और शुगर मिलों में प्रोसेस करके सफेद दानेदार चीनी में बदला जाएगा, और उसके बाद ही यह रिटेल मार्केट में ग्राहकों तक पहुंचेगी।
उत्पादन का अनुमान और निर्यात पर सरकारी पाबंदी का असर
NFCSF ने घरेलू सप्लाई को पूरी तरह पर्याप्त बताया है और 2025-26 सीजन के लिए अपने नेट शुगर प्रोडक्शन के अनुमान को 2.79 करोड़ टन पर बरकरार रखा है। इसमें से करीब 24 लाख टन चीनी इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की गई है (भारत में सालाना लगभग 3 करोड़ टन चीनी उत्पादन होता है)। नाईकनवरे के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अनुकूल न होने से भारत ने 20 लाख टन के तय कोटे में से केवल 8 लाख टन का ही निर्यात किया था। घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 13 मई से 30 सितंबर तक चीनी निर्यात पर रोक भी लगा रखी है।
