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पैक्ड फूड पर चीनी-नमक आदि के वॉर्निंग लेबल लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त : सरकार और FSSAI को दिया 2 हफ्ते का अल्टीमेटम


गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पैक्ड फूड (जैसे नमकीन, बिस्किट और चिप्स) पर स्पष्ट रूप से ज्यादा चीनी, नमक और फैट होने की जानकारी देने वाले वॉर्निंग लेबल (जैसे लाल रंग में चेतावनी का लेबल) लगाने के मामले में केंद्र सरकार और FSSAI को आखिरी चेतावनी दी है। बेंच ने सरकार को फैसला लेने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों और बच्चों के स्वास्थ्य के मामले में व्यापारियों का दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि निर्धारित समय में कदम नहीं उठाए गए, तो कोर्ट खुद आदेश जारी करेगा।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: सरकार और FSSAI को 2 हफ्ते का अल्टीमेटम

पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स (जैसे नमकीन, बिस्किट और चिप्स) पर वॉर्निंग लेबल लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना सख्त रुख स्पष्ट कर दिया है। एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को दो सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार पैकेट के सामने वाले हिस्से पर सख्त न्यूट्रिशन वॉर्निंग लागू करने का फैसला नहीं ले पाती है, तो अगली सुनवाई में अदालत अपना आदेश खुद सुनाएगी।

"क्या आप पर कॉर्पोरेट घरानों का दबाव है?": कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने इस मामले में कड़े सवाल दागे। अदालत ने सरकार से पूछा कि छह महीने पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद इस मामले में आनाकानी क्यों की जा रही है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, "क्या आप पर कॉर्पोरेट घरानों का दबाव है? हम जनता के हित में काम कर रहे हैं, अपने लिए नहीं।" याचिकाकर्ता के अनुसार, FSSAI कंपनियों के विरोध को आधार बनाकर स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े सिविल सोसाइटी के प्रमाणों को नजरअंदाज कर रहा है। अदालत ने साफ किया कि यह मामला सीधे तौर पर नागरिकों और बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए कोई भी निर्णय कंपनियों के दबाव में नहीं होना चाहिए।

सरकार और FSSAI की दलील: 'भारतीय नमकीन पर लग जाएगा रेड मार्क'

सुनवाई के दौरान FSSAI ने अदालत को बताया कि फूड इंडस्ट्री पैकेट के सामने वाले हिस्से (फ्रंट) पर वॉर्निंग लेबल लगाने के खिलाफ है। कंपनियों का दावा है कि पैकेट के आगे लाल चेतावनी वाले निशान से उनके व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ेगा। विकल्प के तौर पर FSSAI ने न्यूट्रिशन टेबल में जानकारी देने का सुझाव दिया। वहीं, केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ब्रिजेंदर चाहर ने तर्क दिया कि पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों जैसे- नमकीन, भुजिया और स्नैक्स में स्वाभाविक रूप से नमक और फैट का स्तर अधिक होता है। दलील दी गई कि यदि विकसित देशों के मानक भारत में लागू किए गए, तो कई पारंपरिक खाद्य पदार्थों पर 'रेड वॉर्निंग मार्क' लग जाएगा।

कोर्ट ने खारिज किए तर्क: "क्या भारत हमेशा अविकसित देश ही बना रहेगा?"

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के 'भारतीय नमकीन' और विकसित देशों वाले तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने तीखा सवाल करते हुए पूछा, "क्या भारत को हमेशा एक अविकसित देश ही बने रहना चाहिए?" कोर्ट ने कहा कि निर्माता भले ही इसे पसंद न करें और सोचें कि उनका बिजनेस प्रभावित होगा, लेकिन उपभोक्ता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वह क्या खा रहा है। पीठ ने स्पष्ट किया कि वॉर्निंग लेबल का उद्देश्य उत्पादों की बिक्री रोकना नहीं, बल्कि ग्राहकों को जागरूक करना है। पैकेट पर चेतावनी देखने के बाद उसे खरीदने या न खरीदने का अंतिम निर्णय ग्राहक का ही होगा।

क्या है फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल (FoPL) और दुनिया में इसका प्रभाव

फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल (FoPL) पैकेट के आगे वाले हिस्से पर लगने वाला एक सरल विजुअल सिंबल या रंगीन लेबल होता है। इसका उद्देश्य ग्राहक को तुरंत यह बताना होता है कि प्रोडक्ट में नमक, चीनी या फैट सुरक्षित सीमा से अधिक है। यदि भारत में इसे लागू किया जाता है, तो लोग खान-पान के प्रति अधिक जागरूक होंगे।

वर्तमान में दुनिया के कई देशों, जिनमें चिली, मैक्सिको, ब्राजील, पेरू, उरुग्वे और इजरायल शामिल हैं, में यह लेबलिंग पहले से अनिवार्य है। अध्ययनों के अनुसार, चिली जैसे देशों में इस सिस्टम के लागू होने के बाद लोगों ने अस्वस्थ उत्पादों की खरीद कम कर दी है। इसके परिणामस्वरूप, कंपनियों ने 'अनहेल्दी' लेबल से बचने के लिए अपने उत्पादों में चीनी और नमक की मात्रा को भी कम करना शुरू कर दिया है।

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