संक्षिप्त खबर: अयोध्या कुमारगंज के संयुक्त 100 शैय्या चिकित्सालय में मंगलवार को इलाज के दौरान कांपा निवासी 57 वर्षीय हनुमत प्रसाद तिवारी की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही, बाहर से लगभग 1200 की दवा मंगाने और समय पर ऑक्सीजन न देने का आरोप लगाते हुए समाजसेवी प्रदीप यादव के साथ धरना दिया। अस्पताल में दो दिन से बिजली के संकट और जनरेटर के लिए तेल के अभाव की बात भी सामने आई है। इससे पहले ज्यादातर दवाएं बाहर से लिखने के आरोप लगे थे, जिसकी ख़बर प्रकाशित होते ही अब उसमें भारी कमी आई है। मौके पर SDM मिल्कीपुर समेत अस्पताल प्रशासन के आश्वासन के बाद धरना खत्म हुआ।
विस्तृत खबर:
अस्पताल में मरीज की मौत के बाद भारी हंगामा, इलाज में लापरवाही का आरोप
कुमारगंज स्थित संयुक्त सौ शैया चिकित्सालय में मंगलवार सुबह कांपा मलईया पांडे का पुरवा निवासी 57 वर्षीय हनुमत प्रसाद तिवारी (57) की इलाज के दौरान मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, मरीज को सुबह करीब 10 बजे अस्पताल लाया गया था, जहां इमरजेंसी में तैनात डॉ. अरविंद मौर्य उनका उपचार कर रहे थे। मृतक के भतीजे और परिजनों ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि इलाज में घोर लापरवाही बरती गई। परिजनों का दावा है कि उनसे बाहर से करीब 1180 रुपये की दवाएं मंगवाई गईं और एक इंजेक्शन लगने के बाद जैसे ही दूसरा इंजेक्शन लगाया गया, मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ गई। आरोप है कि समय रहते ऑक्सीजन नहीं दी गई और पुनः चिकित्सक के पहुंचने से पहले ही मरीज दम तोड़ चुका था।
बिजली गुल, जनरेटर के लिए तेल नहीं: अस्पताल की लचर व्यवस्थाओं की खुली पोल
मरीज की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों के साथ समाजसेवी प्रदीप यादव अस्पताल पहुंचे और इमरजेंसी गेट के पास धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान अस्पताल की लचर व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। यह भी आरोप सामने आया है कि अस्पताल में पिछले 2 दिनों से दिन के समय बिजली नहीं रह रही है, जिससे मरीजों के एक्स-रे और ब्लड टेस्ट पूरी तरह प्रभावित हैं। सरकार द्वारा दिए गए जनरेटर का उपयोग न करने के सवाल पर अस्पताल प्रशासन ने कथित तौर पर दावा किया है कि सरकार की तरफ से तेल के लिए फंड का अभाव है। डॉ. अरविंद मौर्य ने अपने बचाव में बताया कि मरीज के फेफड़ों में संक्रमण था। उन्होंने एक्स-रे लिखा था, लेकिन बिजली न होने के कारण नहीं हो सका। हालत बिगड़ने पर ऑक्सीजन और सीपीआर (CPR) दिया गया, लेकिन मरीज को बचाया नहीं जा सका।
अधिकारियों के आश्वासन पर शांत हुआ मामला, बिना पोस्टमार्टम शव ले गए परिजन
धरने और हंगामे की सूचना मिलते ही उप जिलाधिकारी (एसडीएम) मिल्कीपुर पवन कुमार शर्मा, पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) पीयूष, नायब तहसीलदार रंजन वर्मा और इनायत नगर इंस्पेक्टर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। प्रशासन द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच (एसडीएम, डीएम और सीएमओ स्तर से) कराने के आश्वासन के बाद समाजसेवी प्रदीप यादव और परिजनों ने धरना समाप्त कर दिया। इसके बाद परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया और उसे अपने साथ घर ले गए। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) रवि पाण्डेय ने कहा है कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच कराई जाएगी।
लापरवाही का पुराना इतिहास: आयुष्मान घोटाले से लेकर व्हाट्सएप पर ब्लड रिपोर्ट तक
अस्पताल पर लापरवाही और बदइंतजामी के आरोप लगने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी लंबे समय तक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा बंद रहने और ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट मरीजों को केवल व्हाट्सएप पर मिलने के मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा, मरीजों को बाहर से दवाइयां मंगाने के लिए मजबूर करने और आयुष्मान कार्ड से जुड़े घोटाले के गंभीर आरोप भी अस्पताल पर लग चुके हैं। गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व जब डीबीयूपी इंडिया (DBUP India) पर लखनऊ से अधिकारियों के निरीक्षण की खबर प्रमुखता से दिखाई गई थी, तब जाकर बाहर से मंगाई जा रही दवाइयों के चलन में भारी कमी आई थी। लेकिन मौजूदा घटना और बिजली-जनरेटर के मुद्दे ने एक बार फिर अस्पताल की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।