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26 अगस्त 2026 (बुधवार) को नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही मची है। नेपाल पुलिस के अनुसार अबतक 95 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, कैलाश मानसरोवर जा रहे 133 भारतीयों सहित 500 से अधिक लोग अभी लापता हैं। पुल और सड़कें तबाह हो गई हैं, बिहार में हाई अलर्ट जारी किया गया है। यूपी में सीएम योगी ने बॉर्डर से सटे जिलों को अलर्ट रहने के आदेश दिए हैं, वहीं उत्तराखंड में भी अलर्ट जारी किया गया है।
भोटेकोशी नदी में सैलाब का कहर: 95 की मौत और 500 से अधिक लापता
बुधवार सुबह करीब 9 बजे नेपाल-तिब्बत सीमा के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में तिब्बत की ओर से अचानक बाढ़ आ गई। नेपाल पुलिस के अनुसार, पानी के इस तेज बहाव की चपेट में आकर अब तक 95 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, नेपाल के पर्यटन विभाग का दावा है कि 500 से अधिक लोग लापता हैं, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे 133 भारतीय और 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक शामिल हैं। एक टूर ग्रुप के साथ यात्रा कर रहे 12 ब्रिटिश नागरिक (जिसमें एक 13 साल की बच्ची भी शामिल है), 4 दक्षिण अफ्रीकी और 4 नेपाली भी लापता बताए जा रहे हैं।
बाढ़ के संभावित कारण और तबाही का खौफनाक मंजर
शुरुआती वैज्ञानिक आकलन के अनुसार, ल्हेंदे नदी में बर्फ और पत्थरों के गिरने से पानी का रास्ता रुक गया था, जो अचानक टूटकर फ्लैश फ्लड का कारण बना। ग्लेशियर झील फटने (GLOF) और सुबह 8:37 बजे आए 4.4 तीव्रता के भूकंप से भी इस घटना के जुड़े होने की जांच की जा रही है। इलाके का हवाई मुआयना करने वाले हेलीकॉप्टर पायलट अमन बुधाथोकी ने बताया कि उन्होंने नदी में मलबे के साथ 5 से 6 मीटर ऊंची खौफनाक लहरें बहती देखीं।
बाढ़ के कारण चीन-नेपाल को जोड़ने वाला पुल पूरी तरह तबाह हो गया है। बेत्रावती से रसुवागढ़ी-तिब्बत सीमा तक लगभग 42 किलोमीटर सड़क और स्याफ्रुबेसी से सीमा तक 16 किलोमीटर की सड़क बह गई है। रसुवा के टिमुरे, स्याफ्रुबेसी और बेत्रावती समेत करीब एक दर्जन बस्तियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। नेपाली अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 7 मीटर ऊंचा पानी का बांध अभी भी बना हुआ है, जो कभी भी टूट सकता है। चीनी सरकारी मीडिया सीसीटीवी के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग में भी भूस्खलन से 3 लोगों की मौत हुई है और 265 लोग लापता हैं।
बिहार में बाढ़ का हाई अलर्ट और प्रशासन की तैयारी
नेपाल में आई इस भीषण तबाही का सीधा असर भारत के बिहार राज्य पर पड़ने की आशंका है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी के रास्ते गंडक नदी तक पहुंचेगा, जिससे रेड क्रॉस के अनुसार करीब 3 मीटर ऊंची लहरें आने का अलर्ट है। इसे देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों में खास सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। तटबंधों की निगरानी, रात में गश्त और आपातकालीन टीमों की तैनाती कर दी गई है। इससे पूर्व 24 अगस्त को भी मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित पटना, भागलपुर सहित कई जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया था। अगले कुछ घंटों को बिहार के निचले इलाकों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
