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उत्तराखंड-ख़बरें : हरिद्वार में कांवड़िए से मारपीट और तोड़फोड़; उत्तराखंड में मिले 8300 साल पुरानी मानव सभ्यता के साक्ष्य; बागेश्वर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने की खुदकुशी

सारांश 
हरिद्वार के मंगलौर में कांवड़ खंडित होने के विवाद में हरियाणा के कांवड़िए के साथ मारपीट और कार में तोड़फोड़ की गई, जिसमें पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उधर, आईआईटी रुड़की की सेडा-DNA शोध में खुलासा हुआ है कि 8300 साल पहले उत्तराखंड में मानव सभ्यता मौजूद थी और लोग खेती व तांबा उत्खनन करते थे। वहीं बागेश्वर के बांसतोली में बीएलओ व आंगनबाड़ी कार्यकर्ती कमला देवी का शव पेड़ से लटका मिला; पति ने एसआईआर काम के दबाव का आरोप लगाया, जिसे निर्वाचन विभाग ने खारिज किया है।


1. हरिद्वार में कांवड़ खंडित होने पर हंगामा, हरियाणा के श्रद्धालु की कार तोड़ी, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

कार की टक्कर से खंडित हुई थी कांवड़

उत्तराखंड के हरिद्वार अंतर्गत मंगलौर क्षेत्र में शनिवार रात करीब 8 बजे एक सड़क हादसे के बाद भारी हंगामा देखने को मिला। फरीदाबाद (हरियाणा) निवासी सोनू अपनी एस्प्रेसो कार (HR38AC4479) से हरिद्वार से जल भरकर लौट रहा था। नेशनल हाईवे-58 पर स्थित एक ढाबे के पास सोनू की गाड़ी से टकराकर एक कांवड़ खंडित हो गई।


गाड़ी में तोड़फोड़ और चालक से मारपीट

कांवड़ खंडित होते ही मौके पर मौजूद कांवड़िए और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। कार पर हरियाणा का नंबर देखकर भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया और सोनू को गाड़ी से बाहर खींचकर उसके साथ मारपीट की। लाठी-डंडों से हमला कर कार के सभी शीशे तोड़ दिए गए तथा पिछला दरवाजा मोड़ दिया गया। इस दौरान एक युवक गाड़ी की छत पर चढ़कर कूदने लगा, जिससे छत पूरी तरह से पिचक गई।

पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को पकड़ा

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने पीड़ित सोनू की तहरीर पर मंगलौर कोतवाली में मामला दर्ज किया। जांच के दौरान तोड़फोड़ करने वाले मुख्य आरोपी राजा उर्फ राजेश (निवासी कमेलपुर, रुड़की) की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस घटना में शामिल अन्य अज्ञात युवकों की तलाश कर रही है।

2. उत्तराखंड में 8300 साल पुरानी मानव सभ्यता के प्रमाण, आईआईटी रुड़की की रिसर्च में बड़ा खुलासा

पुरानी धारणा से हजारों साल पीछे गया इतिहास

आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार, उत्तराखंड की हिमालयी वादियों में मानव बसावट का इतिहास अब तक माने जा रहे 4,000 साल के साक्ष्यों से कहीं अधिक पुराना है। 'क्वाटरनरी साइंस रिव्यूज' मैगजीन में प्रकाशित इस शोध में पाया गया कि लगभग 8,300 साल पहले भी इस क्षेत्र में इंसान निवास कर रहे थे, जो धान की खेती करने के साथ-साथ मिट्टी के बर्तन बनाते थे और तांबे का उत्खनन करते थे।

तोली ताल झील की तलहटी से मिले साक्ष्य

डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ साइंस के प्रोफेसर डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव के नेतृत्व में अनुसंधान टीम ने चमोली जिले के गोपेश्वर स्थित तोली ताल झील की तलहटी से कई मीटर गहराई तक ड्रिलिंग कर तलछट (सेडिमेंट) के नमूने जुटाए। झील की परतों के अध्ययन से 18,100 से 13,600 साल पहले के जलवायु परिवर्तनों और जंगलों के विकास के क्रम का पता चला।

सेडा-DNA तकनीक से हुई पुष्टि

वैज्ञानिकों ने तलछट में मौजूद सूक्ष्म जैविक अंशों की जांच के लिए सेडा-DNA (sediment DNA) तकनीक का इस्तेमाल किया। मिट्टी में दबे डीएनए संकेतों से 8,300 साल पूर्व इंसान की उपस्थिति प्रमाणित हुई। इसके अलावा, झील से 3,300 साल पुराने मिट्टी के बर्तनों के अवशेष तथा 2,400 साल पुराने पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन के अंश मिले, जो उस दौर में आग के प्रयोग को दर्शाते हैं।

3. बागेश्वर में पेड़ से लटका मिला बीएलओ का शव, पति ने काम के दबाव को बताया वजह

खेत में पेड़ से लटका मिला शव

बागेश्वर जिले की कांडा तहसील अंतर्गत बांसतोली गांव में रविवार सुबह करीब 11 बजे आंगनबाड़ी कार्यकर्ती एवं बीएलओ कमला देवी (47) का शव उनके घर के समीप खेत में पेड़ से लटका पाया गया। सूचना मिलने पर कांडा थानाध्यक्ष बलवंत कम्बोज पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरते हुए पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।


पति ने लगाया वर्कलोड का आरोप

कपकोट विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या-164 में बीएलओ की जिम्मेदारी संभाल रहीं कमला देवी के पति पूरन राम ने दावा किया कि उनकी पत्नी मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कार्य को लेकर लगातार मानसिक दबाव और अवसाद में थीं। उन्होंने कहा कि काम समय से पूरा न होने पर मिलने वाले नोटिसों और अत्यधिक कार्यभार के कारण परेशान होकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।

निर्वाचन विभाग ने आरोपों को नकारा

कपकोट के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ने पति द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कमला देवी का कार्य रिकॉर्ड संतोषजनक था। उन्हें आवंटित 88 नोटिस वितरण का कार्य उन्होंने निर्धारित समय से पहले पूरा कर लिया था। विभाग के अनुसार, कमला देवी ने कभी भी कार्यभार या दबाव से जुड़ी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। पुलिस का कहना है कि आधिकारिक स्थिति पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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