संक्षिप्त समाचार
नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में 28 अगस्त 2026 तक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1900 से अधिक लोग लापता हैं। तिब्बत बॉर्डर पर बनी अस्थाई झील से दोबारा बाढ़ का खतरा बना हुआ है। बचाव कार्य में सैनिकों के मौत की भी ख़बर है। भारत ने 3 बार राहत सामग्री नेपाल भेजी है। हादसे में छत्तीसगढ़ के भाजपा नेता की बेटी डॉ. मीना गुप्ता समेत 80 यात्री लापता हैं, जबकि चीन में फंसे 400 भारतीय अब सुरक्षित हैं।
तबाही का आंकड़ा और तिब्बत बॉर्डर पर झील का गहराता संकट
ताजा अपडेट के अनुसार, नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से अब तक 547 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 977 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 537 विदेशी नागरिक, नेपाली सेना के 45 जवान और नेपाल पुलिस के 41 कर्मी शामिल हैं। वहीं, तिब्बत क्षेत्र में 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 260 विदेशी नागरिकों समेत 558 लोग लापता हैं। बाढ़ और लैंडस्लाइड के कारण नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी बॉर्डर पोस्ट पूरी तरह तबाह हो गया है। इसके अलावा सड़क, पुल, मकान और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है।
नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी क्षेत्र में हिमस्खलन तथा मलबे से बनी प्राकृतिक झील से निचले इलाकों में लगातार खतरा मंडरा रहा है। काठमांडू स्थित चीनी दूतावास के अनुसार, सहायक नदी में मलबा गिरने से बनी इस झील में करीब 25 लाख क्यूबिक मीटर (2.5 अरब लीटर) पानी जमा हो चुका है। चीनी मीडिया द्वारा जारी फुटेज में झील से पानी ओवरफ्लो होता दिख रहा है। ग्यिरोंग से 6 किलोमीटर दूर दोभान क्षेत्र और निचले इलाकों में रह रहे लोगों को नदी तटों से दूर रहने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
जान पर खेलकर लोगों को बचाते चीनी कर्मचारी की मौत
आपदा के बीच राहत और बचाव का काम जारी है। चीन-नेपाल बॉर्डर पर लैंडस्लाइड के दौरान एक चीनी कर्मचारी हुआंग पेंग (Huang Peng) ने अद्भुत साहस का परिचय दिया। जब मडस्लाइड के कारण लोग जान बचाकर भाग रहे थे, तब हुआंग पेंग ने लोगों को सुरक्षित दिशा में जाने का रास्ता दिखाया। इस दौरान दूसरों की जान बचाते हुए वे खुद हादसे का शिकार हो गए और उनकी मौत हो गई।
पीड़ितों की दर्दनाक आपबीती: कुछ ही सेकंड में जमींदोज हुई इमारतें
तिमुरे गांव के 45 वर्षीय निवासी दावा लामा ने रोते हुए बताया कि बुधवार सुबह करीब 9 बजे तेज आवाज के साथ कीचड़ और पानी की विशाल लहर उनके घर से टकराई। बाढ़ में उनका घर और पत्नी बह गए, जबकि उनकी 7 और 8 साल की दो बेटियां अब भी लापता हैं।
स्याब्रुबेसी में तैनात 41 वर्षीय पुलिस अधिकारी राजन खत्री ने बताया कि सुबह 9:10 बजे बाढ़ की चेतावनी मिलते ही विशाल लहरें पुलिस स्टेशन में दाखिल हो गईं। गाढ़े कीचड़, रेत और बड़े पत्थरों से भरी कई मीटर ऊंची लहरों ने इमारतों को कुछ ही सेकंड में निगल लिया। इस थाने के 7 कर्मचारियों में से केवल 3 ही जीवित बच सके हैं। वहीं, 17 वर्षीय छात्रा स्मृति ओझा के अनुसार, स्कूल जाने की तैयारी के दौरान आई इस बाढ़ में उनका सब कुछ बह गया। हालांकि उनका परिवार सुरक्षित है, लेकिन उनके चार रिश्तेदार लापता हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्री लापता, चीन में फंसे 400 भारतीय सुरक्षित
आपदा में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से वरिष्ठ भाजपा नेता करता राम गुप्ता की बेटी डॉ. मीना गुप्ता भी लापता हो गई हैं। घटना के समय वे अपने 80 सदस्यीय दल के साथ नेपाल-तिब्बत सीमा स्थित इमीग्रेशन सेंटर पर थीं। यह दल कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया था और फिलहाल पूरे दल का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
दूसरी ओर, भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को राहत की खबर देते हुए पुष्टि की है कि नेपाल में आई बाढ़ के बाद चीन की तरफ फंसे करीब 400 भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित कर लिया गया है और वे सभी पूरी तरह सुरक्षित हैं।
